‘दूसरी राधा’ के नाम से चर्चित पूर्व अधिकारी पर फिर गिरी ठगों की नजर
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पूर्व आईजी डीके पांडा एक बार फिर साइबर अपराधियों के जाल में फंस गए। ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर उनसे 4 लाख 32 हजार रुपये ठग लिए। डीके पांडा पहले भी करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
ऐसे हुआ पूरा मामला
धूमनगंज थाना क्षेत्र के एचआईजी एडीए कॉलोनी निवासी पूर्व आईजी डीके पांडा, जिन्हें लोग ‘दूसरी राधा’ के नाम से जानते हैं, ने बताया कि वे मुंडेरा स्थित इंडियन बैंक का हेल्पलाइन नंबर इंटरनेट पर खोज रहे थे। इसी दौरान एक अज्ञात नंबर से उन्हें फोन आया। कॉलर ने खुद को बैंक का अधिकारी बताया और अपना नाम राहुल बताया।
कॉलर ने भरोसा जीतने के बाद व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा और उस पर क्लिक करने को कहा। बातों में उलझाकर ठग लगातार उनसे फोन पर बातचीत करता रहा। इसी बीच उनके खाते से 4.32 लाख रुपये निकल गए। थोड़ी देर बाद जब पांडा को शक हुआ, तब तक उनके खाते से पैसा साफ हो चुका था। इसके बाद उन्होंने धूमनगंज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पहले भी हुई थी करोड़ों की ठगी
यह पहली बार नहीं है जब पूर्व आईजी डीके पांडा साइबर अपराध का शिकार हुए हैं। अक्टूबर 2024 में उन्होंने 381 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि उन्होंने लंदन की एक कंपनी में ट्रेडिंग के जरिए यह रकम कमाई थी, जिसे साइबर अपराधियों ने उड़ा लिया। उस मामले की जांच अभी भी पुलिस कर रही है।
पुलिस ने शुरू की जांच
धूमनगंज पुलिस ने नई शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी जांच की जा रही है। वहीं, पुलिस बार-बार लोगों से सतर्क रहने की अपील करती रही है।
साइबर अपराध से बचाव ही सुरक्षा
पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लोग किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी अज्ञात नंबर से आई कॉल पर अपने बैंक विवरण साझा करें। जागरूकता ही साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
One thought on “प्रयागराज: पूर्व आईजी डीके पांडा बनीं साइबर ठगी का शिकार, बैंक अधिकारी बनकर उड़ाए 4.32 लाख रुपये”