बाराबंकी शादी विवाद: सात फेरे से पहले दूल्हे की पहचान पर हंगामा, पुलिस की मौजूदगी में लौटी बारात

सात फेरे से पहले दूल्हे की पहचान पर हंगामा

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश। जिले के एक गांव में शादी समारोह उस समय विवाद में बदल गया जब सात फेरे से ठीक पहले दूल्हे की पहचान को लेकर सवाल उठ खड़े हुए। कार्यक्रम में बधाई और नेग लेने पहुंचे किन्नर समुदाय के कुछ लोगों ने दूल्हे को पहचानने का दावा किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और मामला पुलिस तक पहुंच गया। अंततः आपसी सहमति से शादी रोक दी गई और बारात बिना दुल्हन के लौट गई।


शादी की रस्मों के बीच उठा विवाद

शुक्रवार रात बारात धूमधाम से गांव पहुंची थी। स्वागत, जयमाला और अन्य प्रारंभिक रस्में पूरी हो चुकी थीं। शनिवार सुबह विवाह की आगे की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान नेग लेने आए किन्नर समुदाय के कुछ सदस्यों ने दूल्हे की पहचान को लेकर आपत्ति जताई।

उनका दावा था कि दूल्हा पहले से उनके समुदाय से जुड़ा रहा है। यह बात फैलते ही समारोह स्थल पर हलचल मच गई। लड़की पक्ष ने तुरंत शादी की प्रक्रिया रोक दी और दूल्हे के परिवार से स्पष्टीकरण मांगा।


आरोपों के बाद बढ़ा तनाव

घटना की जानकारी मिलते ही गांव के लोग भी मौके पर एकत्र हो गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।

लड़की पक्ष का कहना था कि उन्हें दूल्हे के बारे में पूरी और सही जानकारी नहीं दी गई थी। वहीं दूल्हे के परिवार ने आरोपों को नकारते हुए इसे गलतफहमी बताया। स्थिति बिगड़ती देख कुछ बाराती वहां से चले गए।


पुलिस पहुंची मौके पर, कराया समझौता

सूचना मिलने पर स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत कराया और अलग-अलग बातचीत की। कई घंटों तक चली चर्चा के बाद परिवारों ने आपसी सहमति से विवाह न करने का फैसला किया।

पुलिस के अनुसार, किसी भी पक्ष ने लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई। इसलिए कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। समझौते के बाद बारात बिना दुल्हन के वापस लौट गई।


गांव में चर्चा का विषय बनी घटना

यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि विवाह जैसे सामाजिक संबंधों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि किसी भी पक्ष को महत्वपूर्ण जानकारी पहले से नहीं दी जाती, तो ऐसे विवाद पैदा हो सकते हैं।

सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि विवाह से पहले दोनों परिवारों के बीच स्पष्ट संवाद होना चाहिए। किसी भी तरह की गलतफहमी या जानकारी छिपाने से न केवल दो परिवारों के रिश्ते प्रभावित होते हैं, बल्कि सामाजिक तनाव भी बढ़ सकता है।


पुलिस की अपील

स्थानीय पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून का सहारा लें। अधिकारियों ने कहा कि यदि भविष्य में कोई पक्ष शिकायत दर्ज कराता है, तो नियमानुसार जांच की जाएगी।


निष्कर्ष

बाराबंकी में हुआ यह शादी विवाद एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि पारदर्शिता और आपसी विश्वास किसी भी रिश्ते की नींव होते हैं। समय रहते सही जानकारी साझा करना और खुले संवाद बनाए रखना ऐसे विवादों से बचने में मदद कर सकता है। फिलहाल, गांव में स्थिति सामान्य है, लेकिन यह घटना लंबे समय तक चर्चा में बनी रहने की संभावना है।

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