स्कूल की लापरवाही से कक्षा 5 का छात्र घंटों तक कमरे में बंद रहा, अधिकारियों की मौजूदगी में खुला मामला, जांच के आदेश
बिजनौर (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से शर्मनाक लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक परिषदीय विद्यालय में कक्षा 5 का छात्र वंश स्कूल के कमरे में ताले में बंद कर दिया गया। स्कूल का सारा स्टाफ उसे कमरे में ही छोड़कर घर चला गया, और वह बच्चा घंटों तक अकेले कमरे में रोता रहा।
हैरत की बात यह रही कि अगर ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी वहां न पहुंचते, तो शायद देर शाम तक किसी को घटना का पता भी न चलता।
कैसे खुला मामला?
यह घटना हल्दौर ब्लॉक के गांव तुला के नवादा के प्राथमिक विद्यालय की है।
4 अक्टूबर को जब ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (BDO) सौरभ कुमार यादव पास ही स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे, तो उन्हें बंद स्कूल के भीतर से बच्चे के रोने और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।
अधिकारी ने तुरंत गाड़ी रुकवाई और स्कूल की इमारत के पास जाकर देखा तो एक बच्चा अंदर कमरे में बुरी तरह घबराया हुआ शोर मचा रहा था।
उस वक्त स्कूल समय सीमा के बाद (करीब 4:00 बजे) बंद हो चुका था, जबकि स्कूल का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित है।
ताला खुलवाकर बाहर निकाला गया छात्र
खंड विकास अधिकारी ने तुरंत ग्राम प्रधान और स्थानीय ग्रामीणों को मौके पर बुलाया। साथ ही स्कूल के शिक्षकों को सूचना दी और तत्काल बुलाया गया।
कुछ ही देर में शिक्षक पहुंचे और कमरे का ताला खोलकर छात्र वंश को बाहर निकाला गया।
बाहर आते ही वंश अपनी मां को देखकर लिपट गया और फूट-फूट कर रोने लगा। वह डरा हुआ था और पूरी तरह सहमा हुआ नजर आ रहा था।
मां को नहीं थी जानकारी
छात्र की मां रिंकी देवी ने बताया कि वह तो अपने बच्चों के स्कूल से लौटने का इंतजार कर रही थीं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि वंश स्कूल में ही बंद रह गया है। उन्होंने स्कूल के स्टाफ की इस लापरवाही पर गहरा आक्रोश जताया।
ग्रामीणों में नाराजगी, जांच के आदेश
घटना सामने आने के बाद गांव के लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि खंड विकास अधिकारी वहां नहीं पहुंचते, तो पता नहीं बच्चा कब तक कमरे में बंद रहता।
बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कसाना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा:
“यह एक गंभीर लापरवाही है। खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। रिपोर्ट के आधार पर दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी।”
लापरवाही से उठते सवाल
इस घटना ने परिषदीय स्कूलों की कार्यशैली और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
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बच्चों की उपस्थिति और अनुपस्थिति की जांच क्यों नहीं की गई?
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स्कूल बंद करते समय किसी ने कमरे की जांच क्यों नहीं की?
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एक मासूम को इस तरह भूल जाना और बंद कर देना क्या शिक्षक की ज़िम्मेदारी नहीं?
निष्कर्ष
बिजनौर की यह घटना केवल एक बच्चे की लापरवाही से क्लास में बंद होने की नहीं है, यह पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक है। जहां शिक्षक का काम बच्चों को पढ़ाना और उनकी देखभाल करना है, वहीं ऐसी घटनाएं दर्शाती हैं कि जिम्मेदारी निभाने में चूक हो रही है।
अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है, या यह मामला भी कुछ दिनों में ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
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