बुरहानपुर (मध्यप्रदेश) – जिले के एक सरकारी स्कूल में सूर्य नमस्कार से पहले छात्रों को नमाज के स्टेप्स कराने का मामला सामने आया है। जांच के बाद डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) ने इस मामले में शिक्षक जबूर अहमद तड़वी को निलंबित कर दिया है। यह मामला देवरी गांव के प्राथमिक विद्यालय का है, जहां शुक्रवार को शिकायत मिलने के बाद शनिवार को अफसरों की टीम ने स्कूल का दौरा किया।
छात्राओं ने खुद अफसरों के सामने बताए नमाज के स्टेप्स
जिला शिक्षा अधिकारी संतोष सिंह सोलंकी और अन्य अफसर जब स्कूल पहुंचे, तो उन्होंने बच्चों से पूरे मामले की जानकारी ली।
कक्षा 5वीं की छात्राओं ने अफसरों के सामने पुष्टि की कि उन्हें नियमित रूप से सूर्य नमस्कार से पहले नमाज की स्टेप्स कराई जाती थीं।
छात्राओं ने मौके पर ही वे स्टेप्स दोहराकर दिखाए, जिससे मामला स्पष्ट हो गया।
डीईओ ने तुरंत इस पर रिपोर्ट तैयार की और आरोपी शिक्षक को प्राथमिक जांच के बाद निलंबित कर दिया।
शिकायत के बाद हुआ खुलासा
यह मामला तब सामने आया जब हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष अजीत परदेसी शुक्रवार को स्कूल पहुंचे। उन्होंने अभिभावकों और छात्राओं से बातचीत की।
छात्राओं ने बताया कि शिक्षक जबूर अहमद तड़वी उन्हें हर दिन नमाज की तरह झुकने और उठने के स्टेप्स कराते थे।
अभिभावकों ने भी इस पर आपत्ति जताई और कहा कि स्कूल में इस तरह की धार्मिक गतिविधियाँ नहीं होनी चाहिए। एक अभिभावक ने बताया –
“दीपावली की छुट्टियों के दौरान बच्चों ने बताया कि स्कूल में नमाज जैसे स्टेप्स कराए जाते हैं। हमने इसकी शिकायत स्कूल और शिक्षा विभाग से की।”
इसके बाद जनशिक्षक मौके पर पहुंचे और पूरे प्रकरण की रिपोर्ट डीईओ कार्यालय को सौंपी।
प्रशासन ने लिया त्वरित एक्शन
जिला शिक्षा अधिकारी के साथ-साथ अपर कलेक्टर वीर सिंह चौहान ने भी मामले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि
“बच्चों के बयानों के बाद शिक्षक जबूर अहमद तड़वी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।”
अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में धर्मनिरपेक्ष वातावरण बनाए रखना जरूरी है और किसी भी शिक्षक द्वारा धार्मिक प्रथाओं को थोपना अनुशासनहीनता मानी जाएगी।
जांच में और क्या हुआ सामने
प्राथमिक जांच में पता चला कि कुछ दिनों से बच्चों को योगाभ्यास की जगह नमाज जैसे आसन कराए जा रहे थे।
शिक्षक जबूर अहमद का कहना था कि वे बच्चों को “फिटनेस के लिए झुकने और उठने के अभ्यास” कराते थे, न कि नमाज।
हालांकि, बच्चों और अभिभावकों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास नहीं मिला।
डीईओ ने बताया कि मामले को विभागीय जांच समिति को सौंपा गया है। यदि आरोप पुख्ता साबित होते हैं, तो शिक्षक के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने जताया आक्रोश
घटना के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने स्कूल के बाहर विरोध जताया। उनका कहना था कि सरकारी स्कूलों में केवल योग और सूर्य नमस्कार जैसे सामान्य व्यायाम कराए जाने चाहिए, न कि किसी धर्म विशेष की प्रथाएं।
एक अभिभावक ने कहा –
“हम अपने बच्चों को शिक्षा के लिए भेजते हैं, न कि धार्मिक गतिविधियाँ सीखने के लिए। प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”
प्रशासन की सख्त चेतावनी
अपर कलेक्टर वीर सिंह चौहान ने सभी स्कूलों को चेतावनी दी है कि
“यदि किसी भी सरकारी स्कूल में धार्मिक गतिविधियों की शिकायत मिली, तो संबंधित शिक्षक और प्राचार्य दोनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
विभाग ने शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में साप्ताहिक निरीक्षण करें ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
निष्कर्ष
बुरहानपुर स्कूल नमाज-योग विवाद ने शिक्षा व्यवस्था और धार्मिक निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षक को निलंबित कर दिया है और जांच जारी है। अब देखना यह होगा कि जांच में शिक्षक पर लगे आरोप कितने गंभीर साबित होते हैं।

