बेगूसराय में 15 अगस्त पर हादसा: झंडा खोलते समय बिजली के तार की चपेट में आया पाइप, एक छात्र की मौत, दो गंभीर

स्कूल में स्वतंत्रता दिवस के बाद झंडा उतारते समय हुआ दर्दनाक हादसा

स्कूल में स्वतंत्रता दिवस के बाद झंडा उतारते समय हुआ दर्दनाक हादसा

बेगूसराय, बिहार — 15 अगस्त की शाम बेगूसराय जिले के पहाड़चक गांव में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में झंडा उतारते समय एक दर्दनाक हादसा हो गया। झंडा खोलने के दौरान लोहे का पाइप 11,000 वोल्ट की हाई-वोल्टेज बिजली लाइन से टकरा गया, जिससे एक छात्र की मौत हो गई और दो अन्य छात्र गंभीर रूप से झुलस गए। यह घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में हुई।


घटना की पूरी जानकारी

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, स्कूल में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। परंपरा के अनुसार, शुक्रवार की शाम (15 अगस्त के बाद) को झंडा उतारने की प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान स्कूल की शिक्षिका नीलम कुमारी का बेटा आयुष कुमार, जो नौवीं कक्षा का छात्र था, अपने दो दोस्तों के साथ झंडा खोलने की जिम्मेदारी निभा रहा था।

झंडा उतारते समय इस्तेमाल किया गया लोहे का पाइप अचानक तीनों छात्रों से फिसल गया और वह स्कूल के पास से गुजर रहे 11,000 वोल्ट के तार से टकरा गया। पाइप के तार से छूते ही तीनों छात्रों को तेज़ करंट लग गया।


एक छात्र की मौत, दो की हालत गंभीर

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और झुलसे हुए छात्रों को इलाज के लिए बेगूसराय के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों ने आयुष कुमार को मृत घोषित कर दिया। अन्य दो छात्र गंभीर रूप से झुलसे हैं और उनका इलाज जारी है।


घटना के बाद मचा कोहराम

इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृत छात्र आयुष के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, घायल छात्रों के परिजनों की भी हालत गंभीर बनी हुई है। घटना की जानकारी मिलने पर मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।


स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

स्थानीय वार्ड पार्षद और अन्य ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए बिजली विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि घनी आबादी वाले इलाके से हाई-वोल्टेज बिजली की तारें बिना किसी सुरक्षा कवर के गुजर रही हैं, जो कि बहुत खतरनाक है। यदि तारों पर इंसुलेटेड कवर लगाया गया होता, तो यह हादसा टल सकता था।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बिजली विशेषज्ञों का कहना है कि लोहे का पाइप बिजली के अच्छे कंडक्टर होते हैं और अगर ऐसे पाइप खुले बिजली के तारों से टकरा जाएं, तो उसमें मौजूद लोग तुरंत बिजली की चपेट में आ जाते हैं। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है कि स्कूल और सार्वजनिक स्थलों के पास से गुजरने वाली बिजली की लाइनों को सुरक्षित किया जाए


निष्कर्ष: जिम्मेदार कौन?

बेगूसराय की यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे शिक्षण संस्थान और सार्वजनिक क्षेत्र बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? जहां एक ओर स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रभक्ति के पर्व पर बच्चों में उत्साह रहता है, वहीं ऐसी लापरवाहियों के कारण मासूम जानें चली जाती हैं

सरकार और बिजली विभाग को चाहिए कि वे जल्द से जल्द ऐसी खुली बिजली लाइनों को इंसुलेटेड तारों से बदलें और स्कूलों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

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