पिनाका-4: भारत की अगली पीढ़ी की गाइडेड रॉकेट प्रणाली
भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। अब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) एक नई और अत्याधुनिक गाइडेड रॉकेट प्रणाली पिनाका-4 पर कार्य कर रहा है। यह प्रणाली भारत की तोपखाना शक्ति को एक नए स्तर पर ले जाएगी। पिनाका-4 की रेंज 300 किलोमीटर तक होगी और इसे 2030 तक भारतीय सेना में शामिल करने की योजना है। ट्रायल 2028 में शुरू किए जाएंगे।
क्या है पिनाका-4?
पिनाका-4, DRDO द्वारा विकसित एक उन्नत मल्टी-बरल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली है जो पहले के पिनाका वर्जन जैसे Mk-I और Mk-II की तुलना में कहीं ज्यादा प्रभावी और शक्तिशाली होगी। इस रॉकेट सिस्टम में उन्नत गाइडेंस, उच्च रेंज और एयर डिफेंस को चकमा देने की क्षमता होगी। इसका उपयोग रणनीतिक ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए किया जाएगा।
विकास प्रक्रिया और सहयोग
पिनाका-4 को DRDO के Armament Research and Development Establishment (ARDE) द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसमें निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Solar Industries Limited भी साझेदार है। इस परियोजना का उद्देश्य एक ऐसा रॉकेट सिस्टम तैयार करना है जो पारंपरिक टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों का सस्ता, सटीक और भरोसेमंद विकल्प हो।
प्रमुख विशेषताएं
- रेंज: 300 किलोमीटर
- वारहेड क्षमता: 250 किलोग्राम
- गाइडेंस सिस्टम: DRDO द्वारा विकसित GNC टेक्नोलॉजी (10 मीटर CEP)
- कैलिबर: 300 मिमी
- मिड-कोर्स मैन्युवरेबिलिटी और ECCM तकनीक
संचालन में आसान
पिनाका-4 को मौजूदा पिनाका लॉन्चरों के साथ संगत बनाया गया है, जिससे लॉजिस्टिक लागत कम होगी और इसे भारतीय सेना की मौजूदा पिनाका रेजीमेंट में आसानी से एकीकृत किया जा सकेगा। यह सुविधा इसे अधिक व्यावहारिक और युद्ध-तैयार बनाती है।
एयर डिफेंस को चकमा देने की क्षमता
पिनाका-4 प्रणाली प्रलय SRBM से प्रेरित है जिसमें जेट वैन, MaRV और क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्ट्री जैसी तकनीकें होंगी। यह दुश्मन के रडार और इंटरसेप्टर को भेदने में सक्षम होगा। इससे यह S-400 जैसे सिस्टम की पकड़ से बच सकता है और गहराई में मौजूद दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरबेस और लॉजिस्टिक हब पर हमला कर सकता है।
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रणनीतिक महत्व
पिनाका-4 का निर्माण क्षेत्रीय खतरों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के फतह-2 रॉकेट को भारतीय MR-SAM द्वारा हरियाणा में रोका गया था। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत को ऐसे रॉकेट सिस्टम की जरूरत है जो लंबी दूरी से सटीक वार कर सके और एयर डिफेंस को मात दे सके। पिनाका-4 इसी जरूरत को पूरा करेगा।
चीन और पाकिस्तान से मुकाबला
चीन की PLA रॉकेट फोर्स द्वारा संचालित PHL-16 प्रणाली (250–500 KM रेंज) के जवाब में भारत पिनाका-4 के रूप में समान क्षमता वाला हथियार विकसित कर रहा है। इससे भारत की LAC के साथ स्थिति मजबूत होगी और वह चीन की संख्यात्मक बढ़त को तकनीक के बल पर काउंटर कर सकेगा।
निष्कर्ष
पिनाका-4 भारत की रक्षा शक्ति को एक निर्णायक बढ़त देने वाला सिस्टम होगा। इसकी तकनीकी विशेषताएं, लंबी दूरी की मारक क्षमता और एयर डिफेंस से बचने की ताकत इसे भारत की रणनीतिक संपत्ति बनाती हैं। DRDO और निजी उद्योगों का यह सहयोग भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम आगे ले जाएगा।

