भीलवाड़ा (राजस्थान): राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में साइबर ठगी की एक चौंकाने वाली कोशिश का मामला सामने आया है। एक महिला मंडल के व्हाट्सएप ग्रुप में शादी का निमंत्रण कार्ड भेजकर साइबर अपराधियों ने ठगी की साजिश रची। जैसे ही ग्रुप की कुछ महिलाओं ने लिंक डाउनलोड किया, उनके व्हाट्सएप अकाउंट और बैंकिंग ऐप्स हैक हो गए। हालांकि समय रहते चेतावनी देने और बैंकों की सुरक्षा प्रणाली के चलते ठग पैसे निकालने में नाकाम रहे।
शादी के कार्ड के नाम पर भेजा गया फर्जी लिंक
यह घटना 16 अक्टूबर की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, महिला मंडल की एक सदस्य के मोबाइल पर उनकी परिचित के नंबर से एक शादी के इनविटेशन कार्ड का लिंक भेजा गया।
लिंक पर क्लिक करते ही कार्ड तो खुला नहीं, लेकिन कुछ ही देर में उनका व्हाट्सएप अनइंस्टॉल हो गया और फोन हैंग होने लगा।
रात करीब 3 बजे उन्हें एक व्हाट्सएप कॉल भी आया, जिसके बाद उनका मोबाइल पूरी तरह से फ्रीज़ हो गया। सुबह जांच करने पर पता चला कि उनका ‘फोन पे’ ऐप हैक हो चुका है और एसबीआई अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करने की कोशिश की गई थी।
सौभाग्य से बैंक की सुरक्षा प्रणाली के कारण यह ट्रांजैक्शन रुक गया और कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ।
150 से ज्यादा महिलाएं आईं निशाने पर
महिला मंडल के इस व्हाट्सएप ग्रुप में 150 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई थीं।
लिंक भेजे जाने के बाद ग्रुप में कई महिलाओं के मोबाइल फोन हैंग हो गए और कुछ का डेटा एक्सेस भी ठगों के पास चला गया।
समय रहते कुछ सदस्यों ने ग्रुप में चेतावनी संदेश साझा किया, जिससे बाकी महिलाएं लिंक खोलने से बच गईं।
APK फाइल के जरिए किया गया फोन हैक
ग्रुप की सदस्य ललिता खमेसरा ने बताया कि जैसे ही उन्होंने लिंक खोला, उनका व्हाट्सएप अपने आप हट गया और मोबाइल बंद होने लगा।
बाद में जांच में पता चला कि यह एक “एपीके (APK)” फाइल थी, जिसे डाउनलोड करते ही मोबाइल का पूरा नियंत्रण साइबर ठगों के हाथ में चला जाता है।
इसी ग्रुप की सदस्य रीना जैन ने कहा, “मैं किचन में थी जब ग्रुप में शादी का कार्ड आया। लगा कि किसी परिचित की शादी है, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद एक चेतावनी संदेश आया कि यह फर्जी लिंक है। अगर संदेश देर से आता, तो शायद हम सभी ठगी की शिकार बन जाते।”
विशेषज्ञों की चेतावनी – “APK फाइल से रहें सावधान”
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे लिंक के जरिए ठग मोबाइल में रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते हैं।
इससे वे बैंकिंग ऐप्स, गैलरी, कॉन्टैक्ट्स और ओटीपी तक पहुंच बना लेते हैं।
उन्होंने सलाह दी है कि कोई भी व्यक्ति अज्ञात नंबर या लिंक से आए फाइल को कभी डाउनलोड न करे, खासकर यदि वह “.apk” फॉर्मेट में हो।
साइबर सेल को दी गई शिकायत
घटना की सूचना भीलवाड़ा साइबर सेल को दी गई है।
पुलिस ने ठगों की पहचान के लिए तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
साइबर सेल के अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह का काम हो सकता है, जो लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर ठगी की कोशिश करता है।
सोशल मीडिया पर बढ़ रहे साइबर फ्रॉड
हाल के दिनों में राजस्थान सहित देशभर में सोशल मीडिया ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं।
साइबर अपराधी अब शादी के निमंत्रण, सरकारी योजना, बैंक अपडेट या ऑफर के नाम पर फर्जी लिंक भेज रहे हैं।
ऐसे में विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे किसी भी संदिग्ध संदेश पर क्लिक न करें और दो-चरणीय सत्यापन (Two-Step Verification) सक्रिय रखें।
निष्कर्ष
भीलवाड़ा का यह मामला इस बात का सबक है कि साइबर ठग अब भावनाओं को निशाना बना रहे हैं।
शादी का कार्ड या त्योहारों के शुभकामना संदेश के बहाने ठगी की कोशिशें बढ़ गई हैं।
लोगों को चाहिए कि किसी भी लिंक या एप्लीकेशन को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांच लें और सतर्क रहें।

