Site icon Post4india

भोपाल में लोकायुक्त का बड़ा खुलासा: रिटायर इंजीनियर जीपी मेहरा के ठिकानों से 33 लाख कैश, ढाई किलो सोना और करोड़ों की संपत्ति बरामद

रिटायर इंजीनियर जीपी मेहरा के ठिकानों से 33 लाख कैश, ढाई किलो सोना और करोड़ों की संपत्ति

भोपाल, मध्य प्रदेश | राजधानी भोपाल में लोकायुक्त की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर सिविल इंजीनियर जीपी मेहरा के चार ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में करीब 33 लाख रुपये नकद, ढाई किलो सोना, पांच किलो चांदी, 50 लाख रुपये की ज्वेलरी, 56 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और करोड़ों की चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए गए हैं।


करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि जीपी मेहरा के पास उनकी आय के अनुपात से कहीं अधिक संपत्ति है। अधिकांश संपत्तियां परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं।
मेहरा 1984 बैच के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी रहे हैं और फरवरी 2024 में रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के बाद उनकी संपत्ति में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई, जिसके बाद लोकायुक्त ने जांच शुरू की।


भोपाल में मुख्य ठिकानों पर छापेमारी

लोकायुक्त की टीम ने सबसे पहले भोपाल स्थित जीपी मेहरा के मुख्य आवास पर छापा मारा।
यहां से मिला:

इसके बाद टीम ने उनके एक अन्य फ्लैट की तलाशी ली, जहां से ₹25 लाख कैश, ढाई किलो सोना और पांच किलो चांदी बरामद हुई।


पाइप फैक्ट्री और रिसोर्ट में निवेश के सबूत

जांच में यह भी सामने आया कि जीपी मेहरा की गोविंदपुरा स्थित एक पाइप फैक्ट्री में पार्टनरशिप है।
इसके अलावा नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर में उनका फार्म हाउस, निर्माणाधीन रिसोर्ट, गौशाला, फिश फार्मिंग पाउंड और छह ट्रैक्टर सहित कृषि उपकरण मिले हैं।
वहां कई किलो शहद का भंडार भी मिला है, जिससे स्पष्ट होता है कि मेहरा ने विभिन्न व्यवसायों में निवेश किया हुआ था।


disproportionate assets का मामला

लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, अब तक की जांच में मिली संपत्तियों की कुल कीमत कई करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
जांच टीम का कहना है कि यह संपत्तियां जीपी मेहरा के ज्ञात आय स्रोतों के अनुपात से कहीं अधिक हैं।
फिलहाल आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।


 जांच में सामने आए मुख्य बिंदु


 जांच जारी, और खुलासे की संभावना

लोकायुक्त टीम ने बरामद संपत्तियों की वैधता की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि रिटायरमेंट के बाद भी मेहरा की संपत्ति में तेजी से वृद्धि हुई, जो संदिग्ध मानी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में बैंक खातों, निवेश और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद कुल संपत्ति का सटीक आकलन किया जाएगा।


 निष्कर्ष

भोपाल में लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी अफसरों की भ्रष्टाचार में संलिप्तता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिटायर इंजीनियर जीपी मेहरा के खिलाफ मिली संपत्तियों के सबूत यह दिखाते हैं कि सिस्टम में पारदर्शिता की जरूरत अभी भी बाकी है।
अब देखना होगा कि जांच पूरी होने के बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई कितनी आगे बढ़ती है और क्या जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत उदाहरण देखने को मिलेगा।

यह भी पढ़ें:  Crime Katha Bihar: 1989 का भागलपुर दंगा — जब नफरत ने इंसानियत को जिंदा जला दिया

Exit mobile version