वोटर अधिकार यात्रा से तेज हुए सियासी हमले
बिहार की राजनीति में एक बार फिर तेजस्वी यादव बनाम नीतीश कुमार की जंग सुर्खियों में है। आरजेडी नेता और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने अपनी वोटर अधिकार यात्रा के दौरान शुरू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को “चाचा” कहकर संबोधित किया। लेकिन यात्रा के अंतिम चरण में पटना पहुंचते-पहुंचते उनके तेवर पूरी तरह बदल गए और उन्होंने नीतीश कुमार को “भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह” कह डाला। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तेजस्वी ने अचानक इतना बड़ा हमला क्यों किया?
चाचा से भ्रष्टाचार के प्रतीक तक
यात्रा के दौरान तेजस्वी लगातार नीतीश को चाचा कहकर घेरते रहे। उन्होंने यहां तक कहा कि,
“हमारे चाचा इतनी बार पलटी मार चुके हैं कि अब उनका दिमाग चकरा गया है।”
लेकिन पटना पहुंचते ही उनका लहजा और कठोर हो गया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है। हाल ही में इंजीनियरों के पास से सैकड़ों करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस पर कोई बयान नहीं दिया। इसी संदर्भ में तेजस्वी ने नीतीश को भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह करार दिया।
नीतीश कुमार की यूएसपी पर सीधा वार
नीतीश कुमार की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत रही है उनका क्राइम और करप्शन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस वाला चेहरा। लंबे समय से वे खुद को सुशासन बाबू के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव ने नीतीश की इसी यूएसपी पर हमला बोलकर चुनावी रणनीति बदली है।
विश्लेषक अमिताभ तिवारी के अनुसार, तेजस्वी को यह समझ आ गया कि बिहार में चुनाव के दौरान भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है। इसीलिए उन्होंने नीतीश कुमार को सीधे निशाने पर लिया ताकि यह संदेश जाए कि अब महागठबंधन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी एनडीए को चुनौती देने के लिए तैयार है।
अपने कोर मुद्दों पर लौटे तेजस्वी
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क का कहना है कि शुरुआत में तेजस्वी ने राष्ट्रीय मुद्दों को तवज्जो दी, लेकिन जमीनी फीडबैक के बाद उन्होंने महसूस किया कि बिहार में असली मुद्दे क्राइम और करप्शन ही हैं। यही कारण है कि यात्रा के अंतिम चरण में वह अपने कोर मुद्दों पर लौट आए।
उन्होंने कहा कि हाल ही में अधिकारियों और इंजीनियरों के यहां से बरामद नकदी पर सरकार को घेरना तेजस्वी के लिए बड़ा मौका था। हालांकि शुरुआत में राहुल गांधी के कार्यक्रमों में उलझकर उन्होंने यह मौका गंवा दिया, लेकिन अब आक्रामक होकर वह नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं।
चुनावी वादों पर भी नीतीश-तेजस्वी आमने-सामने
तेजस्वी यादव ने अपनी यात्रा के दौरान कई बड़े चुनावी वादे किए। इनमें महिलाओं को 2500 रुपये प्रति माह भत्ता, फ्री बिजली और नौकरी में डोमिसाइल पॉलिसी शामिल हैं।
लेकिन नीतीश सरकार ने भी तेजस्वी की योजनाओं को काउंटर करने की कोशिश की। सरकार ने 125 यूनिट फ्री बिजली, महिलाओं को 10 हजार रुपये और शिक्षक नियुक्ति में डोमिसाइल पॉलिसी का ऐलान कर दिया। इसी वजह से तेजस्वी ने नीतीश सरकार को “नकलची सरकार” करार दिया।
स्ट्रैटेजी शिफ्ट कितना असरदार?
2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने मुद्दों पर फोकस करके आरजेडी को सबसे बड़ी पार्टी बना दिया था। हालांकि सरकार बनाने से चूक गए थे, लेकिन एनडीए को कड़ी टक्कर दी थी।
इस बार भी तेजस्वी ने शुरू में व्यक्तिगत हमलों से दूरी बनाई थी। लेकिन अब भ्रष्टाचार और सुशासन जैसे मुद्दों पर नीतीश को घेरकर उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी चुनावी रणनीति बदल चुकी है।
नतीजा क्या होगा?
नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोलकर तेजस्वी यादव ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि बिहार की सियासत में अब वह ही असली विकल्प हैं।
चाचा से लेकर “भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह” कहने तक का सफर यह बताता है कि तेजस्वी आने वाले चुनाव में और आक्रामक रुख अपनाने के मूड में हैं।
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