Site icon Post4india

मथुरा बाढ़ 2025: यमुना में डूबा भगवान कृष्ण का ऐतिहासिक विश्राम घाट, श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार

यमुना में डूबा भगवान कृष्ण का ऐतिहासिक विश्राम घाट

विश्राम घाट पर बाढ़ का कहर

मथुरा में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और इसका असर ऐतिहासिक विश्राम घाट पर साफ दिखाई दे रहा है। वही घाट, जहां भगवान कृष्ण ने कंस वध के बाद विश्राम किया था, आज पूरी तरह पानी में डूबा हुआ है। घाट के गुम्बद और मंदिरों के पिलर तक यमुना का पानी पहुंच गया है।

ऐतिहासिक घाट पानी में समाया

विश्राम घाट न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह मथुरा की पहचान भी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बढ़ते जलस्तर ने घाट की पूरी संरचना को जलमग्न कर दिया है। मंदिरों के पिलर और गुम्बद तक पानी भर गया है, जिससे यहां आने-जाने में लोगों को परेशानी हो रही है। घाट के बीच से बहता तेज पानी इस आपदा की भयावहता को और स्पष्ट कर रहा है।

आस्था और हिम्मत का संगम

हालांकि स्थिति भयावह है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था डगमगाई नहीं है। कई लोग घुटनों तक पानी में खड़े होकर पूजा-पाठ कर रहे हैं। भक्तों का कहना है कि चाहे यमुना का जलस्तर कितना भी बढ़ जाए, वे अपने आराध्य श्रीकृष्ण की भक्ति करना नहीं छोड़ेंगे।

ब्रज में बाढ़ का कहर

केवल विश्राम घाट ही नहीं, बल्कि पूरा ब्रज क्षेत्र इस बाढ़ से प्रभावित है। यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है।

ब्रज में बाढ़ का कहर

कॉलोनियों और घरों में घुसा पानी

जयसिंहपुरा और आसपास के इलाकों में सैकड़ों घर यमुना के पानी में डूब गए हैं। कई घरों में ताले लगे हुए हैं क्योंकि लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है।

राहत और बचाव कार्य जारी

जिला प्रशासन और राहत दल लगातार काम में जुटे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों को नावों और स्टीमर की मदद से बाहर निकाला जा रहा है। मथुरा प्रशासन ने 5 बाढ़ राहत केंद्र स्थापित किए हैं, जहां विस्थापित परिवारों को भोजन और आश्रय दिया जा रहा है।

धार्मिक नगरी पर संकट

मथुरा और वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों पर बाढ़ का असर भक्तों और स्थानीय लोगों दोनों को प्रभावित कर रहा है। जहां एक ओर घर और दुकानें पानी में डूब गई हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर परिसर भी जलमग्न हो रहे हैं। इसके बावजूद श्रद्धालु भगवान कृष्ण और यमुना माता की पूजा करना जारी रखे हुए हैं।


निष्कर्ष

मथुरा का ऐतिहासिक विश्राम घाट और पूरा ब्रज क्षेत्र यमुना की बाढ़ से बेहाल है। यमुना का जलस्तर खतरे से ऊपर बह रहा है, कॉलोनियां डूब रही हैं और लोग पलायन कर रहे हैं। हालांकि, इस संकट के बीच श्रद्धालुओं की आस्था अडिग बनी हुई है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं, लेकिन हालात पर काबू पाने में अभी समय लग सकता है।

यह भी पढ़ें:  पंजाब बाढ़ 2025: 1902 गांव डूबे, 43 लोगों की मौत, 4 लाख प्रभावित – केंद्र से मदद की अपील

Exit mobile version