महाराष्ट्र की राजनीति का स्थायी चेहरा
महाराष्ट्र की राजनीति में अगर किसी नेता ने लगातार सत्ता के केंद्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, तो वह नाम है अजित पवार। अलग-अलग सरकारें बनीं, गठबंधन बदले, लेकिन उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) की कुर्सी पर अजित पवार की भूमिका बार-बार देखने को मिली। यही वजह है कि उन्हें राज्य की राजनीति का सबसे प्रभावशाली और व्यावहारिक नेता माना जाता है।
शरद पवार की छत्रछाया से सियासत की शुरुआत
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देओलाली प्रवरा में हुआ। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार के भतीजे हैं। बचपन से ही उन्हें राजनीतिक माहौल मिला और चाचा की छत्रछाया में उन्होंने राजनीति की बारीकियां सीखीं।
साल 1982 में उन्होंने सहकारी चीनी मिल के बोर्ड सदस्य के रूप में राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सांसद से विधायक तक का सफर
अजित पवार 1991 में पहली बार बारामती से लोकसभा सांसद बने। हालांकि बाद में उन्होंने यह सीट शरद पवार के लिए खाली कर दी। इसके बाद उन्होंने राज्य की राजनीति पर फोकस किया।
साल 1995 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता और फिर लगातार कई बार बारामती से विधायक चुने गए। वे अब तक एक बार सांसद और सात बार विधायक रह चुके हैं।
डिप्टी सीएम के रूप में रिकॉर्ड
अजित पवार को महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बार उपमुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड हासिल है। वे अब तक छह बार डिप्टी सीएम रहे हैं।
-
2010–2012
-
2012–2014
-
2019 (संक्षिप्त कार्यकाल)
-
2019–2022 (महा विकास आघाड़ी)
-
2023
-
2024 के बाद
लगभग 15 साल तक वे किसी न किसी रूप में सत्ता के शीर्ष स्तर पर बने रहे।
वित्त मंत्री के तौर पर मजबूत पकड़
अजित पवार को एक सख्त और निर्णायक प्रशासक माना जाता है। वे महाराष्ट्र के सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कृषि, सिंचाई, ऊर्जा और योजना जैसे अहम विभाग संभाले।
सीएम क्यों नहीं बन पाए अजित पवार?
साल 2004 में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को बहुमत मिला था और उस समय माना जा रहा था कि एनसीपी का मुख्यमंत्री बन सकता है। राजनीतिक समीकरणों के चलते यह मौका हाथ से निकल गया। इसके बाद भी कई अवसर आए, लेकिन अजित पवार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए।
शरद पवार से अलग राह
साल 2023 में अजित पवार ने एनसीपी के एक बड़े गुट के साथ अलग होकर भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ सरकार में शामिल होने का फैसला किया। इसके बाद चुनाव आयोग से एनसीपी का नाम और चुनाव चिह्न उन्हें मिला, जबकि शरद पवार को नया दल बनाना पड़ा।
निष्कर्ष
अजित पवार का राजनीतिक जीवन सत्ता, रणनीति और निरंतर प्रभाव की मिसाल है। मुख्यमंत्री भले न बन पाए हों, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी भूमिका और पकड़ निर्विवाद रही है। आने वाले समय में भी राज्य की सियासत में उनका नाम अहम बना रहेगा।
One thought on “महाराष्ट्र की राजनीति में ‘डिप्टी सीएम’ अजित पवार: 45 साल का सियासी सफर और सत्ता में पकड़”