मुंबई पोवई बंधक कांड: किराये के घर के विवाद से शुरू हुई थी कहानी, रोहित आर्या ने मांगे थे 2 लाख रुपये

किराये के घर के विवाद से शुरू हुई थी कहानी

मुंबई के पोवई इलाके में 17 बच्चों समेत 19 लोगों को बंधक बनाने वाला रोहित आर्या गुरुवार को पुलिस एनकाउंटर में मारा गया. शुरुआती जांच में पता चला है कि इस खौफनाक वारदात की जड़ें उसके किराये के घर को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ी थीं. आरोपी ने “वेब सीरीज ऑडिशन” के बहाने लोगों को स्टूडियो में बुलाया था, जहां उसने तीन घंटे तक सभी को बंधक बनाकर रखा.


कैसे शुरू हुआ पोवई बंधक कांड

घटना गुरुवार दोपहर की है, जब पोवई के एक स्टूडियो में अचानक हड़कंप मच गया. वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी कि एक व्यक्ति ने 17 बच्चों और 2 बड़ों को बंधक बना लिया है. पुलिस मौके पर पहुंची और बातचीत के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन आरोपी रोहित आर्या ने किसी की बात नहीं मानी.
पुलिस के अनुसार, आर्या ने खुद को एयरगन से लैस बताया और धमकी दी कि अगर कोई नजदीक आया तो वह किसी को भी नुकसान पहुंचा देगा. स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उसने एक बंधक पर निशाना साधने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई और वह मारा गया.


‘वेब सीरीज ऑडिशन’ बना फरेब का जाल

पुलिस जांच में सामने आया है कि रोहित आर्या ने सभी बंधकों को “वेब सीरीज के ऑडिशन” के नाम पर बुलाया था. उसने सोशल मीडिया पर विज्ञापन दिया था कि बच्चों के लिए बड़े प्लेटफॉर्म पर ऑडिशन चल रहा है. इस बहाने वह माता-पिता और बच्चों को स्टूडियो में लेकर आया और फिर अंदर से दरवाजे बंद कर दिए.
मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, उसने लगातार खुद को निर्दोष बताते हुए पुराने विवादों में फंसाने की बात कही, लेकिन उसकी हरकतें पूरी तरह असंतुलित थीं.


किराये के घर से जुड़ा था तनाव

मामले की तह में जाने पर पुलिस को पता चला कि आर्या और उसकी पत्नी अंजलि आर्या, पुणे के कोथरुड इलाके के शिवतीर्थ नगर में किराये के मकान में रहते थे. उन्होंने 28 अक्टूबर 2024 को मकान मालिक देशपांडे के साथ 36 महीने का रेंट एग्रीमेंट किया था.
लेकिन पड़ोसियों की शिकायतों और अनुचित व्यवहार के कारण मकान मालिक ने उन्हें घर खाली करने का नोटिस भेज दिया. इसके बाद विवाद बढ़ गया.


2 लाख रुपये मुआवजे की अजीब मांग

2 मार्च 2025 को रोहित आर्या ने किराया देना बंद कर दिया और उल्टा मकान मालिक से 2 लाख रुपये मुआवजे की मांग करते हुए नोटिस भेज दिया. कई दौर की बातचीत और लिखित समझौतों के बावजूद मामला सुलझा नहीं.
मकान मालिक ने आखिरकार 1.75 लाख रुपये देने की सहमति दी, लेकिन फिर भी आर्या दंपत्ति घर खाली करने को तैयार नहीं हुए. मई 2025 में पुलिस हस्तक्षेप के बाद आखिर उन्हें मकान से निकाला गया.


मानसिक तनाव में रचा बंधक कांड

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मकान खाली कराने के बाद से ही रोहित आर्या और उसकी पत्नी आर्थिक व मानसिक तनाव में थे. वह एक रिश्तेदार के यहां अस्थायी रूप से रह रहा था और पिछले कुछ महीनों से अजीब व्यवहार कर रहा था.
जांच में सामने आया है कि उसने किराये के विवाद और अपनी बदनामी से बदला लेने के इरादे से यह पूरी योजना बनाई थी.


पुलिस कर रही है पृष्ठभूमि की जांच

मुंबई पुलिस ने आरोपी की पृष्ठभूमि और उसकी मानसिक स्थिति की जांच शुरू कर दी है. मकान मालिक देशपांडे द्वारा दिए गए सभी दस्तावेज पुलिस ने जब्त कर लिए हैं. इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या आर्या के पीछे किसी नेटवर्क या बाहरी साजिश का हाथ था.
डीसीपी ने बताया कि सभी बंधक सुरक्षित हैं और उन्हें परामर्श दिया जा रहा है.


स्थानीय लोग अब भी सदमे में

पोवई में इस घटना के बाद से लोग सदमे में हैं. इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार निगरानी कर रही है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसा बंधक संकट उन्होंने पहली बार देखा है.


निष्कर्ष

रोहित आर्या की कहानी यह दिखाती है कि निजी विवाद और मानसिक अस्थिरता किस तरह एक सामान्य व्यक्ति को अपराध की सीमा तक पहुंचा सकती है. पुलिस अब मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों.

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