क्या कहा वीडियो में: मुरिदके में थे ट्रेनिंग कैंप
लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर कासिम ने एक वीडियो बयान में पाकिस्तान के मुरिदके (मुरीदके) में स्थित आतंकी कैंप की मौजूदगी और वहाँ ट्रेनिंग देने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की है। कासिम ने कहा कि भारत के कथित ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह कैंप ध्वस्त किया गया था और बताया कि नया कैंप पहले से बड़ा बनाया जाएगा।
वीडियो में कासिम मरकज़-ए-तैयबा के पास दिखाई देता है और खुलकर स्वीकार करता है कि वहां कई तालिबान और आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जाता था। उसके इन बयानों ने पाकिस्तान की उस दलील की सत्यता पर प्रश्न उठा दिए हैं जिसमें वह बार-बार अपने यहां ऐसे कैंप होने का खंडन करता रहा है।
युवाओं को भर्ती करने की खुलेआम अपील
वीडियो का एक हिस्सा में कासिम सीधे तौर पर युवाओं से अपील कर रहा है कि वे पंजाब (Pakistan) के मुरिदके स्थित दौर-ए-सुफ्फा प्रोग्राम में शामिल हों। उसने इसे धार्मिक शिक्षा का हिस्सा बताकर भेदभाव किए बिना हथियार प्रशिक्षण और विचारधारात्मक ब्रेनवॉश की बात कही। इस प्रकार की खुलेआम अपील ने सुरक्षा एजेंसियों और जनता में चिंता बढ़ा दी है।
पाकिस्तान की नाराज़ी और अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ
किसी भी देश के लिए यह गंभीर संकेत है जब किसी आतंकवादी कमांडर से इसी तरह की कबूलयात सामने आती है। कासिम के बयानों ने पाकिस्तान की उस सार्वजनिक कहानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिसमें वह बार-बार अपने इलाके में ट्रेनिंग कैंप होने से इन्कार करता रहा है।
यह घटनाक्रम क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम पैदा करता है—क्योंकि ऐसे कैंपों से हथियारों, ट्रेनिंग और विचारधारा का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसार संभव होता है।
पिछला रुख: धमकी और गीदड़भभकी
इससे पहले भी लश्कर के वरिष्ठ नेताओं ने भारत को धमकाने वाले बयान दिए हैं। अभियान चलाने वाले नेताओं ने राजनीतिक व सीमापार हमलों की बातें की हैं, जिनसे दोनों तरफ की सुरक्षा-स्थिति पर असर पड़ता है। ऐसे बयानों से द्विपक्षीय तनाव और कूटनीतिक चुनौती दोनों बढ़ सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों और सरकार के लिए संकेत
कासिम के बयान से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि आतंकवाद-रोधी व खुफिया एजेंसियों को सतर्क रहना होगा। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय निगरानी, सीमाओं पर कड़ी जांच और सूचना-साझेदारी की आवश्यकता अब और बढ़ गई है। साथ ही, सघन जांच से यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि इन कबूलनामों की पृष्ठभूमि क्या है, और किस हद तक ये बयानों का भौतिक सत्यापन संभव है।
निष्कर्ष: कबूलनामा उठाता है सुरक्षा व नीतिगत प्रश्न
लश्कर कमांडर कासिम का मुरिदके कैंप संबंधी कबूलनामा न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है बल्कि यह पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क की मौजूदगी और उनकी भर्ती रणनीतियों पर भी नए सवाल खड़े करता है। इस बयान के बाद आवश्यक होगा कि संबंधित देशों की एजेंसियां ठोस तथ्यों की जांच करें और राजनीतिक व सुरक्षा स्तर पर आवश्यक कार्रवाई और बातचीत तेज करें।
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