मेरठ में सेंट्रल मार्केट कॉम्प्लेक्स पर चला बुलडोजर: 11 साल पुराना केस, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई

11 साल पुराना केस, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई

Meerut Demolition News:
उत्तर प्रदेश के मेरठ में अवैध निर्माणों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई जारी है। शहर के शास्त्री नगर इलाके के सेंट्रल मार्केट कॉम्प्लेक्स को आखिरकार बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया, जिसे 11 साल पहले ही अदालतों ने अवैध घोषित कर दिया था।
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2024 के आदेश और उसके बाद अवमानना याचिका पर हुई सुनवाई के बाद की गई है।


क्या है सेंट्रल मार्केट कॉम्प्लेक्स का मामला?

मेरठ के शास्त्री नगर की प्लॉट संख्या 661/6 पर स्थित यह कॉम्प्लेक्स वर्ष 1990 से 1995 के बीच बनाया गया था।
यह भूमि मूल रूप से आवासीय प्रयोजन के लिए थी, लेकिन यहां व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया गया।
करीब 22 दुकानदार वर्षों से यहां कारोबार कर रहे थे।

2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस निर्माण को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे।
व्यापारियों ने इस आदेश को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचाया, जहां दिसंबर 2024 में उच्चतम न्यायालय ने अंतिम फैसला सुनाते हुए कॉम्प्लेक्स को अवैध करार दिया।


अवमानना याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी करीब 10 महीने तक कार्रवाई नहीं हुई
इसके बाद याचिकाकर्ता लोकेश खुराना ने अवमानना याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
इस पर सुनवाई की तारीख 27 अक्टूबर 2025 तय की गई।
आवास विकास परिषद ने उसी दिन ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी और कॉम्प्लेक्स को जेसीबी और ड्रिल मशीनों की मदद से गिरा दिया गया


आवास विकास परिषद का बयान

आवास विकास परिषद के अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप की गई है।
उन्होंने कहा,

“यह कॉम्प्लेक्स बिना स्वीकृत नक्शे के बनाया गया था, इसलिए इसे वैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत के आदेशों का पालन करना हमारी जिम्मेदारी है।”

उन्होंने आगे बताया कि इस प्रकरण में 67 अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही की एफआईआर दर्ज की गई है।
यह जांच की जा रही है कि किस अधिकारी के कार्यकाल में अवैध निर्माण हुआ और किनकी निगरानी में नियमों की अनदेखी की गई।


31 और अवैध कॉम्प्लेक्स पर गिरेगा बुलडोजर

राजीव कुमार ने जानकारी दी कि शहर में ऐसे 31 और व्यावसायिक परिसर हैं जो आवासीय भूमि पर बने हैं।
इनकी सूची तैयार कर ली गई है और आने वाले दिनों में इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि यह कार्रवाई अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने और शहरी नियोजन को सुदृढ़ करने के लिए जरूरी है।


व्यापारियों ने बताया अन्यायपूर्ण कदम

वहीं, सेंट्रल मार्केट के दुकानदारों ने प्रशासन की कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया है।
व्यापारियों का कहना है कि उनकी दुकानें वैध दस्तावेजों पर रजिस्टर्ड हैं।
उनके पास बिजली कनेक्शन, रजिस्ट्री और जीएसटी पंजीकरण जैसे सभी व्यावसायिक प्रमाण हैं।

एक दुकानदार ने कहा,

“हम पिछले 25 साल से यहीं व्यापार कर रहे हैं। किसी ने कभी यह नहीं बताया कि यह जमीन अवैध है। अब अचानक हमारी आजीविका छीन ली गई।”

व्यापारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से उनका लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और वे पुनर्वास या मुआवजे की मांग कर रहे हैं।


अवैध निर्माणों पर मेरठ प्रशासन का सख्त रुख

मेरठ प्रशासन अब “ज़ीरो टॉलरेंस नीति” पर काम कर रहा है।
शहर में अवैध रूप से बने भवन, मार्केट और दुकानों की लिस्ट तैयार की जा चुकी है।
प्रशासन का कहना है कि किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति का क्यों न हो।


निष्कर्ष

सेंट्रल मार्केट कॉम्प्लेक्स का ध्वस्तीकरण मेरठ में अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रहे अभियान का प्रतीकात्मक कदम बन गया है।
जहां एक ओर प्रशासन इसे कानूनी कार्रवाई बता रहा है, वहीं व्यापारी इसे अन्याय और आर्थिक क्षति के रूप में देख रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन बाकी 31 अवैध परिसरों पर भी यही सख्ती दिखाता है या नहीं।

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