रामपुर हत्याकांड में 23 दोषियों को एक साथ उम्रकैद: 20 साल पुरानी जमीन रंजिश का खौफनाक अंजाम, पत्नी बोलीं — अब मिला इंसाफ

23 दोषियों को एक साथ उम्रकैद

🔹 रामपुर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में 20 बीघा ग्राम समाज की जमीन को लेकर चली आ रही 20 साल पुरानी दुश्मनी ने एक परिवार की खुशियाँ छीन ली थीं। इसी विवाद में संजीव पांडे की हत्या कर दी गई थी। अब 8 साल बाद न्यायालय ने इस मामले में 23 आरोपियों को एक साथ उम्रकैद की सजा सुनाई है।
यह फैसला रामपुर की जिला जज अदालत ने सुनाया, जिसमें सभी दोषियों पर ₹85,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है।


🔹 22 जुलाई 2017 को हुई थी हत्या

यह घटना 22 जुलाई 2017 की है। उस दिन थाना मिलक क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम समाज की जमीन को लेकर हुए विवाद में संजीव पांडे पर घातक हमला किया गया था।
अभियोजन के अनुसार, सभी 23 अभियुक्तों ने एक राय बनाकर फायर आर्म और धारदार हथियारों से संजीव पांडे व उनके परिजनों पर हमला किया।
हमले में संजीव पांडे गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हुए थे।


🔹 परिवार ने दर्ज कराया मुकदमा

घटना के बाद संजीव पांडे के भाई बाबूराम ने थाना मिलक में IPC की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया।
पहली चार्जशीट 17 आरोपियों के खिलाफ 2017 में और बाकी 6 के खिलाफ 2018 में दाखिल की गई थी।


🔹 अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी

जिला शासकीय अधिवक्ता अमित सक्सेना के अनुसार, मृतक संजीव पांडे अपने भाई और रिश्तेदारों के साथ खेत पर गए थे। वहीं पर पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान 20 गवाहों ने अदालत में स्पष्ट गवाही दी, जिससे अभियुक्तों के खिलाफ आरोप “बिना किसी संदेह” के साबित हो गए।
अभियोजन पक्ष ने सभी साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट को मजबूती से पेश किया, जिसके आधार पर अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।


🔹 कोर्ट ने सुनाई सजा और लगाया जुर्माना

जिला जज की अदालत ने सभी 23 अभियुक्तों को निम्न सजा सुनाई —

  • धारा 302 (हत्या) में आजीवन कारावास और ₹50,000 जुर्माना

  • धारा 307 (हत्या का प्रयास) में 10 वर्ष की सजा और ₹30,000 जुर्माना

  • धारा 147 व 148 (हिंसक झगड़ा व सशस्त्र अपराध) में अतिरिक्त सजा

इस प्रकार, प्रत्येक दोषी पर कुल ₹85,000 का अर्थदंड लगाया गया है। अदालत का यह फैसला न्यायिक दृष्टि से एक दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है, क्योंकि एक ही मामले में इतने अधिक दोषियों को एक साथ उम्रकैद की सजा कम ही सुनाई जाती है।


🔹 पत्नी ने कहा — “अब मिला असली इंसाफ”

मृतक की पत्नी सोनी देवी ने अदालत के इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा —

“मेरे पति को जमीन विवाद में बेरहमी से मार दिया गया था। 8 साल तक हमने न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी। आज 23 लोगों को सजा मिलने से मुझे और मेरे तीन बच्चों को इंसाफ मिला है।”


🔹 प्रशासन और पुलिस की भूमिका

अभियोजन अधिकारियों का कहना है कि पुलिस ने इस केस में साक्ष्य एकत्र करने में मेहनत की थी।
फोरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान और मेडिकल प्रमाणों के आधार पर अदालत ने दोषियों को कठोर सजा दी।


🔹 न्याय की जीत, अपराधियों को सबक

रामपुर के इस मामले में अदालत का फैसला न केवल न्याय की जीत है बल्कि यह अपराधियों के लिए चेतावनी भी है कि देर-सबेर कानून अपना काम जरूर करता है।
20 साल पुरानी रंजिश ने भले एक परिवार की जान ली, लेकिन अब अदालत के फैसले से यह संदेश गया है कि “न्याय में देर हो सकती है, पर अंधेर नहीं।”

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