फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को रायबरेली में मारे गए दलित युवक हरिओम वाल्मीकि के परिवार से मुलाकात की। राहुल ने परिवार से संवेदना जताई और उत्तर प्रदेश सरकार से न्याय की मांग की। मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा,
“मैं परिवार से मिलूं या न मिलूं, लेकिन इन्हें न्याय तो मिलना चाहिए। सरकार को न्याय देना ही होगा।”
हरिओम वाल्मीकि की 2 अक्टूबर को रायबरेली में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद प्रदेश सरकार ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी, लेकिन मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है।
✦ परिवार से मिलने फतेहपुर पहुंचे राहुल गांधी
राहुल गांधी शुक्रवार सुबह कानपुर पहुंचे, जहां से वे सड़क मार्ग से फतेहपुर पहुंचे। यहां उन्होंने हरिओम वाल्मीकि के घर जाकर उनके परिवार से मुलाकात की।
हालांकि, इससे पहले परिवार ने एक बयान जारी कर राहुल से मिलने से इनकार कर दिया था। परिवार का कहना था कि वे “किसी भी राजनीतिक दल के नेता से मुलाकात नहीं करना चाहते” और सरकार की मदद से संतुष्ट हैं।
इसके चलते पुलिस ने राहुल गांधी के काफिले को कुछ देर के लिए रोक दिया था। बाद में प्रशासन से बातचीत के बाद उन्हें परिवार से मिलने की अनुमति दी गई।
✦ राहुल गांधी बोले — “परिवार को धमकाया जा रहा है”
परिवार से मिलने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है।
“परिवार ने बताया कि सरकार के लोगों ने धमकाया है, उनसे जबरन वीडियो बनवाया गया है। ऐसा लग रहा है जैसे अपराध परिवार ने किया है, जबकि अपराध उनके खिलाफ हुआ है। इन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है।”
राहुल गांधी ने कहा कि हरिओम का परिवार सिर्फ न्याय की मांग कर रहा है, और सरकार को जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
“मैं मुख्यमंत्री से कहना चाहता हूं कि अपराधियों की रक्षा मत कीजिए। दलितों पर अत्याचार पूरे देश में बढ़ रहा है, अब यह बंद होना चाहिए।”
✦ परिवार ने पहले की थी मुलाकात से मना
राहुल गांधी के फतेहपुर पहुंचने से पहले हरिओम के छोटे भाई शिवम वाल्मीकि ने मीडिया से कहा था कि वे किसी भी राजनीतिक नेता से मुलाकात नहीं करेंगे।
शिवम ने कहा,
“मेरे भाई की हत्या रायबरेली में हुई थी। सरकार के दो कैबिनेट मंत्री हमारे घर आए, उन्होंने मदद दी और परिवार के दो सदस्यों को सरकारी नौकरी दी। हम सरकार से संतुष्ट हैं। राहुल गांधी या किसी भी पार्टी के नेता राजनीति करने के लिए न आएं।”
इसके बावजूद राहुल गांधी परिवार से मिलने पहुंचे और कहा कि यह राजनीति नहीं, इंसाफ की लड़ाई है।
✦ सरकार का दावा — “परिवार को पूरी मदद दी गई है”
फतेहपुर के एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि राहुल गांधी की सुरक्षा के लिए सभी इंतजाम किए गए थे। उन्होंने कहा,
“सरकार ने मृतक के परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान की है। मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद दी गई है। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी गई है।”
फतेहपुर प्रशासन के अनुसार, मृतक की बहन कुसुम देवी को अमर शहीद जोधा सिंह अटैया ठाकुर दरियाव सिंह चिकित्सा महाविद्यालय में आउटसोर्स स्टाफ नर्स के रूप में नियुक्त किया गया है।
✦ घटना का पृष्ठभूमि
2 अक्टूबर को रायबरेली जिले में दलित युवक हरिओम वाल्मीकि की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
मृतक परिवार को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी, और सुरक्षा व्यवस्था दी गई। लेकिन अब इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, जिसमें कांग्रेस सरकार पर दलितों के प्रति अन्याय का आरोप लगा रही है।
✦ कांग्रेस का आरोप — “दलितों पर बढ़ रहे अत्याचार”
राहुल गांधी ने कहा कि देशभर में दलितों पर अत्याचार और हिंसा बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी सरकार दलित समुदाय के साथ भेदभाव कर रही है और न्याय की प्रक्रिया को कमजोर बना रही है।
“यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज की लड़ाई है। अगर सरकार चाहती है तो 24 घंटे में न्याय दिला सकती है, लेकिन जब राजनीतिक दबाव होता है तो सब कुछ रुक जाता है।”
✦ निष्कर्ष: राजनीति और न्याय के बीच खींचतान
राहुल गांधी की यह मुलाकात उत्तर प्रदेश में दलित अत्याचारों पर कांग्रेस की सियासी सक्रियता को दर्शाती है। वहीं, यूपी सरकार इसे राजनीतिक स्टंट बता रही है।
फतेहपुर में राहुल गांधी का यह दौरा न केवल न्याय की मांग के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
राहुल गांधी का संदेश साफ था — “मुझे मिलो या नहीं, लेकिन पीड़ित परिवार को न्याय जरूर दो।”

