कटान ने उड़ा दिया मंदिर, आंखों में आंसू और गूंजे जय श्री राम के नारे
लखीमपुर खीरी, 15 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के निघासन थाना क्षेत्र स्थित ग्रांट नंबर 12 गांव में गुरुवार को एक दर्दनाक दृश्य सामने आया। यहां शारदा नदी का कटान एक प्राचीन शिव मंदिर को अपनी चपेट में ले लिया और महज 10 सेकंड में पूरा मंदिर नदी में समा गया। यह दृश्य ग्रामीणों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया और देखते ही देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
कटान ने बदल दी पूरी भूगोल की तस्वीर
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, शारदा नदी का यह किनारा हमेशा से कटान की चपेट में रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह खतरा तेज़ी से बढ़ा है। महेश कुमार, गांव के निवासी, बताते हैं, “हम बचपन से इस मंदिर में पूजा करते आए हैं। यह हमारे पूर्वजों के समय का था। पिछले कुछ महीनों से हम देख रहे थे कि नदी की धार मंदिर के पास आ रही है। आज जो हुआ, उसे देखकर आंखें नम हो गईं।”
पानी में समा गया मंदिर
गुरुवार को जैसे ही शारदा नदी का कटान मंदिर की नींव तक पहुंचा, मिट्टी का सहारा टूट गया और कुछ ही पलों में मंदिर का पूरा ढांचा नदी में धंस गया। इस भयानक दृश्य को ग्रामीणों ने मोबाइल कैमरे में कैद किया और जय श्री राम के नारे लगाने लगे। वीडियो में देखा जा सकता है कि मंदिर का ऊपरी हिस्सा पहले हिलता है, फिर धीरे-धीरे झुकता है, और देखते ही देखते पानी में विलीन हो जाता है।
धार्मिक स्थल का नष्ट होना: आस्था का भारी झटका
यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं था, बल्कि यह गांव की पहचान और भावनाओं का प्रतीक भी था। हर साल महाशिवरात्रि और सावन में यहां विशेष पूजा-अर्चना होती थी। लेकिन अब मंदिर के स्थान पर बहती नदी और खाली जमीन को देखकर ग्रामीणों के दिल भारी हैं।
कमला देवी, एक महिला श्रद्धालु ने कहा, “हमने कई बार प्रशासन से कहा था कि कटान को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, लेकिन कोई प्रभावी काम नहीं हुआ। हमारे घर भी अब खतरे में हैं।”
प्रशासन के लिए चुनौती: कटान रोधी कदमों की कमी
कटान प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकना प्रशासन के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। शारदा नदी, जो नेपाल से निकलकर लखीमपुर खीरी से होती हुई बहती है, बरसात के दौरान जलस्तर में कई गुना बढ़ोतरी कर लेती है। तेज़ धार से नदी के किनारे की मिट्टी ढीली हो जाती है, जिससे नदी गांव के अंदर तक पहुंच जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कटान रोधी तटबंध या पक्की दीवारों का निर्माण किया जाता तो शायद मंदिर बच सकता था। लेकिन समय रहते इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
समस्या का समाधान और भविष्य की दिशा
स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर प्रशासन समय पर कटान रोकने के लिए ठोस उपाय करता तो आज यह मंदिर नहीं गिरता। प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए अब आवश्यक है कि कटान रोधी कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। तटबंधों का निर्माण और नदी के मार्ग को स्थिर करना कुछ महत्वपूर्ण उपाय हो सकते हैं, जिनसे भविष्य में गांव और मंदिर जैसी अन्य संपत्तियों की सुरक्षा हो सके।
निष्कर्ष
लखीमपुर खीरी के निघासन क्षेत्र में शारदा नदी का कटाव एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का रूप ले चुका है। यह घटना गांव की धार्मिक पहचान को प्रभावित करने के साथ-साथ प्रशासन की विफलता को भी उजागर करती है। मंदिर का नष्ट होना केवल एक भवन का गिरना नहीं था, बल्कि यह लाखों लोगों की आस्था और विश्वास का टूटना था। जय श्री राम के नारों के साथ यह दृश्य एक भावुक पल के रूप में हमेशा याद रहेगा। प्रशासन को इस घटना से सीख लेनी चाहिए और आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।

