शिवराज पाटिल का निधन: पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता 90 वर्ष की उम्र में चले गए

पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता 90 वर्ष की उम्र में चले गए

कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार सुबह महाराष्ट्र के लातूर में निधन हो गया। 90 वर्षीय पाटिल लंबे समय से बीमार थे और घर पर ही चिकित्सा देखरेख में थे। सुबह लगभग 6:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से महाराष्ट्र सहित देशभर की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।


लंबी बीमारी के बाद 90 वर्ष की उम्र में निधन

शिवराज पाटिल कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। परिवार के अनुसार, उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे पाटिल का इलाज लातूर स्थित उनके निवास पर ही चल रहा था। शुक्रवार सुबह उनका स्वास्थ्य अचानक बिगड़ा और वे दुनिया से विदा हो गए।
पाटिल को भारतीय राजनीति में एक शांत, सुलझे हुए और अनुशासित नेता के रूप में जाना जाता था।


लातूर के लोकप्रिय सांसद थे शिवराज पाटिल

शिवराज पाटिल का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा। वे लातूर लोकसभा सीट से सात बार सांसद चुने गए, जो उनके जनाधार और लोकप्रियता को दिखाता है।
उनकी पहचान एक ऐसे नेता की रही, जिन्होंने हमेशा संयम और मर्यादा के साथ राजनीति की।


शिक्षा और शुरुआती राजनीतिक करियर

  • जन्म: 12 अक्टूबर 1935, चाकुर, लातूर (महाराष्ट्र)

  • शिक्षा: आयुर्वेद में अध्ययन, फिर मुंबई विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री

  • राजनीति में प्रवेश: 1967, लातूर नगर पालिका से राजनीतिक सफर की शुरुआत

पाटिल ने स्थानीय राजनीति से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी मजबूत पहचान बनाई।


संसद और केंद्र सरकार में अहम भूमिकाएँ

शिवराज पाटिल ने केंद्र में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में वे इन मंत्रालयों में राज्य मंत्री रहे—

  • रक्षा

  • वाणिज्य

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

  • परमाणु ऊर्जा

  • इलेक्ट्रॉनिक्स

  • अंतरिक्ष विभाग


लोकसभा स्पीकर के रूप में महत्वपूर्ण कार्यकाल

1991 से 1996 तक वे लोकसभा अध्यक्ष रहे।
उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण सुधार हुए—

  • लोकसभा का कंप्यूटरीकरण

  • कार्यवाही का सीधा प्रसारण

  • नई लाइब्रेरी बिल्डिंग का निर्माण

  • प्रशासनिक और तकनीकी बदलावों की शुरुआत

यह दौर भारतीय संसद के आधुनिकीकरण के लिए बेहद अहम माना जाता है।


पूर्व गृह मंत्री और बाद में पंजाब के राज्यपाल

2004 में वे केंद्र सरकार में गृह मंत्री बने।
हालाँकि, 2008 मुंबई आतंकी हमलों के बाद उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद उन्हें पंजाब का राज्यपाल और चंडीगढ़ का प्रशासक बनाया गया, जहां उन्होंने 2010 से 2015 तक अपना कार्यकाल पूरा किया।


राजनीतिक जगत में शोक

शिवराज पाटिल के निधन के बाद कांग्रेस सहित कई दलों के नेताओं ने दुख व्यक्त किया है।
उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जा रहा है जो शालीनता, ईमानदारी और संवैधानिक मूल्यों के लिए हमेशा खड़े रहे।


निष्कर्ष

शिवराज पाटिल का निधन भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। लगभग छह दशक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनकी सरलता और संयमित राजनीति की मिसाल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

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