भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री की सुरक्षित वापसी
भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 18 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा के बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए हैं। वे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से मंगलवार को भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजे अमेरिका के कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में उतरे। यह वापसी स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल के जरिए हुई, जिसे स्प्लैशडाउन कहा जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी शुभकामनाएं
शुभांशु की वापसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा:
“मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूं। उनके साहस और समर्पण ने अरबों लोगों को प्रेरित किया है। यह भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक मील का पत्थर है।”
मिशन की खास बातें और वैज्ञानिक परीक्षण
शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के तहत स्पेस स्टेशन में 7 वैज्ञानिक परीक्षण किए, जिनका उद्देश्य भारत के आगामी गगनयान मिशन को तकनीकी और जैविक सहायता प्रदान करना था।
- अंतरिक्ष में हरे चने और मेथी के बीज अंकुरित करना
- मांसपेशियों के नुकसान का अध्ययन
- ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक का परीक्षण
स्पेस यात्रा के दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड
- शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचने वाले पहले भारतीय नागरिक बन गए हैं।
- वे राकेश शर्मा (1984) के बाद दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में कदम रखा।
धरती पर वापसी की रोमांचक प्रक्रिया
शुभांशु और उनकी टीम 15 जुलाई की शाम ISS से रवाना हुई थी। उनका स्पेसक्राफ्ट 28,000 किमी/घंटा की रफ्तार से धरती की ओर आया। वापसी के दौरान हीट शील्ड ने 2000 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सहा।
लगभग 23 घंटे के सफर के बाद कैप्सूल को पैराशूट की मदद से सुरक्षित लैंड कराया गया और फिर पानी से बाहर निकाला गया।
ISRO का योगदान और खर्च
इस ऐतिहासिक मिशन में ISRO की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस अंतरिक्ष मिशन पर लगभग 550 करोड़ रुपये खर्च किए। यह निवेश भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के विकास के लिए किया गया था।
बच्चों को प्रेरित करना चाहते हैं शुभांशु
“अगर मैं इस मिशन से एक बच्चे को भी प्रेरित कर पाया, तो खुद को सफल मानूंगा।”
उनकी इस सोच ने देशभर के छात्रों और युवाओं को जोश और प्रेरणा दी है।
देशभर में खुशी का माहौल
लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, जहाँ शुभांशु ने पढ़ाई की थी, वहां छात्र-छात्राएं और अभिभावक इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
दिल्ली के CSIR-NPL ऑडिटोरियम में भी इस वापसी का सीधा प्रसारण दिखाया गया।
वैज्ञानिकों की राय और भविष्य की दिशा
DRDO के पूर्व डीजी विलियम सेल्वमूर्ति और खगोल वैज्ञानिक अमिताभ ने कहा कि यह मिशन भारत के लिए बेहद उपयोगी होगा। इससे भारत के वैज्ञानिक समुदाय को स्पेस रिसर्च में नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।
अब मेडिकल जांच और रिहैबिलिटेशन
धरती पर लौटने के बाद शुभांशु शुक्ला अगले 7 दिनों तक मेडिकल निगरानी और रिहैबिलिटेशन में रहेंगे, ताकि शरीर को फिर से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुरूप ढाला जा सके।
निष्कर्ष: भविष्य की ओर भारत का पहला कदम
शुभांशु शुक्ला की यह अंतरिक्ष यात्रा केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और गगनयान मिशन की नींव है। यह मिशन भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के वैश्विक मंच पर मजबूत बनाने की दिशा में पहला ठोस कदम है।
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