पति की मौत के बाद मां प्रेमी के साथ फरार, घर से ले गई नकदी और जेवर
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला अपने पति की मौत के कुछ समय बाद अपने से कम उम्र के प्रेमी के साथ फरार हो गई। महिला पर 3.5 लाख रुपये नकद और कीमती जेवरात लेकर भागने का गंभीर आरोप है।
यह मामला तब सामने आया जब महिला का 17 वर्षीय बेटा मनीष वर्मा खुद थाने पहुंचा और पुलिस से अपनी मां के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मनीष ने आरोप लगाया कि उसकी मां की हरकतों से न केवल परिवार उजड़ गया है, बल्कि अब उसकी और उसके भाई की जान को भी खतरा है।
मां के प्रेमी पर संपत्ति हड़पने का आरोप, बेटा बोला- खाना भी नहीं है घर में
मनीष के अनुसार, उसके पिता का कुछ समय पहले बीमारी के चलते निधन हो गया था। इसके बाद उसकी मां के मुजफ्फरनगर निवासी अनुज भाटी नामक युवक से प्रेम संबंध बन गए। मनीष ने बताया कि बीते दिनों उसकी मां रेहाना, शहजादी और नूरजहां नाम की तीन महिलाओं के साथ पंजाब गई थी, जहां से वह अनुज के साथ फरार हो गई।
मनीष का आरोप है कि उसकी मां ने न केवल घर की सारी नकदी और जेवर ले लिए, बल्कि अब उसकी नजर पिता की जमीन और अन्य संपत्ति पर भी है।
“घर में खाने के भी लाले पड़े हैं। हम दोनों भाई अकेले रह गए हैं और रोज डर के साए में जी रहे हैं,” मनीष ने थाने में दी गई तहरीर में कहा।
मदद करने की बजाय धमका रहीं हैं मां की सहेलियां
मनीष ने बताया कि मां की तीन सहेलियां—रेहाना, नूरजहां और शहजादी—लगातार उसे और उसके भाई को धमका रही हैं।
उनका कहना है कि वे किसान यूनियन से जुड़ी हुई हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।
“अगर मैंने पुलिस में शिकायत की तो वे मुझे झूठे केस में फंसा देंगी या जान से मार देंगी,” मनीष ने गंभीर आरोप लगाए।
पुलिस को दी तहरीर, अभी तक नहीं हुई ठोस कार्रवाई
यह मामला गंगोह कोतवाली क्षेत्र का है, जहां से महिला 25 जुलाई से लापता है। मनीष ने पुलिस को पूरी जानकारी दे दी है और लिखित तहरीर भी सौंपी है।
“मैं चाहता हूं कि मेरी मां और उनके साथियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, जिससे हमें इंसाफ मिल सके,” मनीष ने थाने में आवेदन देकर कहा।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है, लेकिन पीड़ित परिवार अब भी कार्रवाई के इंतजार में है।
नाबालिग बच्चों के भविष्य पर संकट, प्रशासन से मदद की गुहार
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब एक नाबालिग खुद थाने में जाकर न्याय की गुहार लगा रहा है, तब क्या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह तत्काल और सख्त कदम उठाए?
मनीष और उसका बड़ा भाई अब बिना किसी अभिभावक के, मानसिक और आर्थिक संकट में जीवन जीने को मजबूर हैं।
निष्कर्ष: इंसाफ की मांग कर रहा है एक बेटा, जिम्मेदारी किसकी?
यह मामला न सिर्फ पारिवारिक विघटन का उदाहरण है, बल्कि समाज और प्रशासन के संवेदनशील रवैये की भी परीक्षा है। जब एक बेटा अपनी मां के खिलाफ न्याय के लिए खड़ा होता है, तो यह हमारे सामाजिक ढांचे के लिए गंभीर चेतावनी है।
प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द जांच पूरी कर सख्त कार्रवाई करे, ताकि पीड़ित बच्चों को सुरक्षा और न्याय मिल सके।
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