सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग अंतिम चरण में: चारधाम यात्रा होगी आसान, डेढ़ घंटे का सफर 15 मिनट में

चारधाम यात्रा होगी आसान, डेढ़ घंटे का सफर 15 मिनट में

सिलक्यारा टनल का काम अब अंतिम दौर में

उत्तरकाशी की बहुचर्चित सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। परियोजना का आर-पार (बोरिंग) कार्य पूरा हो चुका है और अब सुरंग के भीतर वॉल स्ट्रेंथनिंग, फेंसिंग और लाइनिंग जैसे सुरक्षा और संरचनात्मक कार्य चल रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार यदि काम योजना के अनुसार चलता रहा, तो यह सुरंग 2026 के अंत तक आम जनता के लिए पूरी तरह तैयार हो सकती है।


जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण, सुरक्षा पर जोर

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सुरंग के अंदर चल रहे काम का निरीक्षण किया और बताया कि वर्तमान में सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुरंग के सिविल वर्क का काम सितंबर तक पूरा होने की संभावना है। इसके बाद परीक्षण और तकनीकी प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही सुरंग को वाहनों के लिए खोलने की प्रक्रिया होगी।


चारधाम यात्रा में होगी बड़ी राहत

सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग के चालू होने से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी लगभग 26 किलोमीटर कम हो जाएगी। इससे चारधाम यात्रा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आवाजाही भी आसान हो जाएगी।
वर्तमान में सिलक्यारा से बड़कोट तक का सफर राड़ी टॉप होते हुए किया जाता है, जिसमें लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता है। सुरंग के खुलने के बाद यह दूरी केवल 15 मिनट में तय की जा सकेगी।


जाम और बर्फबारी की समस्या से मिलेगी राहत

चारधाम यात्रा के दौरान जाम और सर्दियों में बर्फबारी की वजह से मार्ग बंद होने की समस्या आम है। राड़ी क्षेत्र में सड़क संकरी होने के कारण यात्रा सीजन में कई घंटे जाम बन जाता है।
सुरंग के संचालन से इन समस्याओं में काफी हद तक कमी आने की उम्मीद है। यात्रा का समय घटने के साथ-साथ सुरक्षा और सुविधा भी बढ़ेगी।


2023 का बड़ा हादसा भी याद दिलाता है चुनौतियां

इस सुरंग परियोजना का निर्माण 2018 में शुरू हुआ था और इसकी अनुमानित लागत लगभग 1384 करोड़ रुपये थी।
हालांकि 12 नवंबर 2023 को निर्माण के दौरान मिट्टी धंसने से 41 मजदूर सुरंग के भीतर फंस गए थे। यह रेस्क्यू लगभग 17 दिनों तक चला और अंत में सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इस घटना के बाद कुछ समय के लिए काम रोकना पड़ा था।


परियोजना से विकास को नई गति

साल 2024 के मध्य में सुरंग के भीतर जमा मलबा हटाए जाने के बाद कार्य फिर से तेज गति से शुरू हुआ। अब सुरंग के बनकर तैयार होने से उत्तरकाशी और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों के पर्यटन और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


निष्कर्ष

सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग परियोजना का अंतिम चरण में पहुंचना उत्तराखंड के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यदि यह समय से पूरी होती है, तो चारधाम यात्रा और स्थानीय आवागमन दोनों में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा और क्षेत्र में विकास की गति बढ़ेगी।

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