स्पेस स्टेशन में जिंदगी कैसी होती है? भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने पीएम मोदी से साझा किए अनुभव

भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में नई उपलब्धि

भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में नई उपलब्धि

भारत ने अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने अंतरिक्ष में बिताए अपने अनुभव साझा किए। जुलाई 2025 में स्पेस मिशन पूरा कर वे पृथ्वी पर लौटे थे।


पीएम मोदी से खास मुलाकात

सोमवार को प्रधानमंत्री आवास पर शुभांशु शुक्ला और पीएम मोदी की मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और मिशन की सफलता पर बधाई दी। इस दौरान पीएम मोदी ने उनसे अंतरिक्ष स्टेशन पर बीते दिनों और वैज्ञानिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से बातचीत की।

पीएम मोदी ने कहा कि “शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए गर्व का क्षण है। यह आने वाली पीढ़ियों को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।”


स्पेस स्टेशन में जिंदगी कैसी होती है?

शुभांशु शुक्ला ने पीएम मोदी को बताया कि स्पेस स्टेशन पर जीवन पृथ्वी से बिल्कुल अलग होता है। वहां गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण छोटे-छोटे काम भी बड़ी चुनौती बन जाते हैं। खाना, पानी पीना, सोना और यहां तक कि चलना-फिरना भी खास तकनीक की मदद से ही संभव होता है।

उन्होंने बताया कि वहां दिन और रात का एहसास अलग होता है। स्पेस स्टेशन हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर लगाता है, जिसके कारण दिन में कई बार सूर्योदय और सूर्यास्त दिखाई देते हैं।


वैज्ञानिक प्रयोगों पर दिया जोर

शुक्ला ने इस दौरान किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि माइक्रोग्रैविटी में किए गए रिसर्च से दवाइयों और तकनीक के नए रास्ते खुल सकते हैं। खासकर चिकित्सा और संचार के क्षेत्र में यह प्रयोग मानव जीवन को नई दिशा देंगे।


भारतीय एस्ट्रोनॉट पर लोगों की प्रतिक्रिया

शुभांशु शुक्ला की इस उपलब्धि पर देशभर के लोग गर्व महसूस कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देने वालों की लंबी कतार है। लोग उन्हें ‘भारत का सितारा’ और ‘गगन नायक’ कहकर संबोधित कर रहे हैं।

युवा वर्ग के बीच शुभांशु शुक्ला एक नई प्रेरणा बन गए हैं। कई छात्रों ने कहा कि उनकी इस सफलता ने उन्हें भी अंतरिक्ष विज्ञान को करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।


भारत की अंतरिक्ष यात्रा में नया अध्याय

शुभांशु शुक्ला का यह मिशन भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति का प्रतीक है। इससे पहले भारत ने चंद्रयान और गगनयान जैसे मिशनों से दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था। अब भारतीय एस्ट्रोनॉट की ISS यात्रा ने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाले समय में भारत अंतरिक्ष अनुसंधान में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगा और युवाओं को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।


निष्कर्ष

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की स्पेस स्टेशन यात्रा न केवल भारत के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह भारतीय युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत भी है। पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान साझा किए गए अनुभवों ने यह साबित कर दिया कि भारतीय वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।

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