नई दिल्ली। वसंत कुंज स्थित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ स्वामी पार्थसारथी पर शिकंजा कसता जा रहा है। जांच में सामने आया है कि स्वामी के साथ एक ‘लेडी गैंग’ भी काम करती थी, जिसमें संस्थान की तीन महिला वार्डन शामिल थीं। ये महिलाएं छात्राओं पर दबाव बनातीं, उन्हें स्वामी के पास भेजतीं और उनके मोबाइल से अश्लील चैट और संदेश डिलीट करवाती थीं। पुलिस ने तीनों को सह-आरोपी बनाकर एफआईआर दर्ज की है।
‘लेडी गैंग’ का रोल: वार्डन पर गंभीर आरोप
छात्राओं के बयान में साफ हुआ है कि महिला वार्डन न केवल उन्हें स्वामी के कमरे तक भेजती थीं, बल्कि जबरन मोबाइल से चैट और मैसेज डिलीट भी कराती थीं। विरोध करने वाली छात्राओं को फेल करने या स्कॉलरशिप रोकने की धमकी दी जाती थी।
पीड़िताओं के मुताबिक, कई बार फैकल्टी और प्रशासनिक स्टाफ भी स्वामी की मांगें पूरी करवाने में सक्रिय रहते थे।
गरीब छात्राओं पर ज्यादती
जांच में पता चला है कि स्वामी अक्सर उन छात्राओं को निशाना बनाता था, जो EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के तहत दाखिला लेकर आई थीं। इन छात्राओं को विदेश यात्रा का लालच दिया जाता, जबकि इंकार करने पर उन्हें फेल करने की धमकी मिलती।
एंटीसिपेटरी बेल की कोशिश नाकाम
गंभीर धाराओं में केस दर्ज होने के बाद चैतन्यानंद ने अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए अदालत का रुख किया। लेकिन पुलिस की ओर से मजबूत आपत्ति दाखिल किए जाने के बाद उसने अपनी अर्जी वापस ले ली। इस कदम से साफ है कि गिरफ्तारी का डर उसके ऊपर हावी हो चुका है।
नकली नंबर प्लेट और लग्जरी कार
पुलिस ने संस्थान के बेसमेंट से एक वॉल्वो कार जब्त की, जिस पर नकली राजनयिक नंबर प्लेट 39 UN 1 लगी हुई थी। इसके लिए भी अलग एफआईआर दर्ज की गई। 25 अगस्त को पुलिस ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए—एक यौन उत्पीड़न का और दूसरा फर्जी नंबर प्लेट का।
कानूनी धाराएं और केस दर्ज
यह केस वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(2) (यौन उत्पीड़न), धारा 79 (महिला की शीलभंग का प्रयास) और धारा 351(2) (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज हुआ। इसमें स्वामी के साथ तीन महिला वार्डन भी आरोपी हैं।
पहले भी विवादों में रहा है स्वामी
यह कोई पहला मामला नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक,
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2009 में डिफेंस कॉलोनी थाने में धोखाधड़ी और छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ था।
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2016 में वसंत कुंज थाने में भी छेड़छाड़ की शिकायत सामने आई थी।
छात्राओं के बयान और सबूत
अब तक 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए गए हैं, जिनमें 17 ने मजिस्ट्रेट के सामने स्पष्ट तौर पर बताया कि स्वामी गालियां देता, अश्लील मैसेज भेजता और जबरन अनुचित हरकतें करता था। बयान में यह भी सामने आया कि तीनों महिला वार्डन उन्हें बार-बार स्वामी के कमरे में ले जाती थीं।
डिजिटल सबूतों में चैट, एसएमएस और कॉल रिकॉर्ड भी पुलिस ने जब्त किए हैं।
फरार है आरोपी स्वामी
एफआईआर के बाद से चैतन्यानंद फरार है। दिल्ली पुलिस ने कई टीमें गठित की हैं और एयरपोर्ट सहित विभिन्न ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, उसकी अंतिम लोकेशन आगरा में मिली थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह बार-बार ठिकाना बदल रहा है और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बच रहा है।
किताबों से बनाई पहचान
स्वामी ने अब तक 28 किताबें लिखी हैं। इनमें ‘फॉरगेट क्लासरूम लर्निंग’ जैसी किताब का नाम भी है, जिसकी प्रस्तावना स्टीव जॉब्स के नाम से बताई जाती है। ई-कॉमर्स साइटों पर उसे “प्रोफेसर, लेखक और आध्यात्मिक दार्शनिक” बताया गया है। लेकिन अब उसकी लिखी किताबें और प्रचारित पहचान एक बड़े छलावे की तरह सामने आ रही हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग की सक्रियता
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की टीम लगातार मामले पर नजर रखे हुए है ताकि पीड़िताओं को न्याय मिल सके।
निष्कर्ष
स्वामी चैतन्यानंद का केस सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत नहीं, बल्कि संस्थान में सक्रिय एक पूरे नेटवर्क की ओर इशारा करता है। उसकी “लेडी गैंग” की भूमिका ने यह साफ कर दिया है कि किस तरह शक्ति और पद का दुरुपयोग कर छात्राओं का शोषण किया गया। अब सबकी नजर पुलिस की कार्रवाई और स्वामी की गिरफ्तारी पर है।

