हरदोई/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में वाराणसी से मेरठ जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर गुरुवार दोपहर पथराव की घटना सामने आई। पत्थर लगने से C-4 कोच की खिड़की का शीशा टूट गया। ट्रेन में सवार यात्री सुरक्षित हैं। उसी ट्रेन से मोहन भागवत भी मेरठ जा रहे थे, हालांकि वे उस कोच में मौजूद नहीं थे जिस पर पत्थर लगा।
कब और कैसे हुआ हादसा?
घटना दोपहर करीब 3:30 बजे हरदोई और कौढ़ा स्टेशन के बीच हुई। ट्रेन संख्या 22489 वाराणसी-मेरठ रूट पर चल रही थी। C-4 कोच में सीट नंबर 60-61 के पास अचानक पत्थर आकर टकराया, जिससे खिड़की का शीशा चकनाचूर हो गया।
पत्थर लगते ही कोच के अंदर बैठे यात्रियों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई। हालांकि किसी यात्री को चोट नहीं आई और ट्रेन अपनी निर्धारित गति से आगे बढ़ती रही।
खेल-खेल में हुई लापरवाही?
स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह घटना जानबूझकर की गई शरारत नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा हो सकती है।
सीओ सिटी अंकित मिश्रा के अनुसार, कोतवाली देहात क्षेत्र के बलोखर फाटक के पास कंजर बस्ती के कुछ बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। बच्चों की उम्र 8 से 13 वर्ष के बीच बताई जा रही है। खेल के दौरान उछला एक पत्थर तेज रफ्तार से गुजर रही ट्रेन से जा टकराया।
पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह घटना खेल के दौरान हुई लापरवाही लग रही है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
रेलवे और पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही आरपीएफ और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण किया। रेलवे पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रेलवे एक्ट की धारा 153 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मुकदमा संख्या 55/2026 दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही आसपास के इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब हाल ही में उत्तर रेलवे के अधिकारियों ने हरदोई स्टेशन का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद देश की सबसे आधुनिक ट्रेनों में से एक पर पथराव की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेल विशेषज्ञों का मानना है कि रेल पटरियों के आसपास बसे इलाकों में नियमित निगरानी और स्थानीय लोगों को जागरूक करना जरूरी है। तेज रफ्तार ट्रेनों पर पत्थर लगना गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।
यात्री सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
गनीमत रही कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। लेकिन यह मामला साफ करता है कि लापरवाही या शरारत, दोनों ही स्थितियों में परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त गश्त और निगरानी बढ़ाई जाएगी।
निष्कर्ष
हरदोई में वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव की यह घटना चेतावनी है कि रेलवे सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। चाहे यह खेल के दौरान हुई लापरवाही हो या किसी की शरारत, तेज रफ्तार ट्रेनों के आसपास सतर्कता अनिवार्य है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज—दोनों की साझा जिम्मेदारी है।