हरिद्वार: मनसा देवी मंदिर में भगदड़ से 8 की मौत, 25 घायल — लापरवाही ने ली जान

मनसा देवी मंदिर में भगदड़ से 8 की मौत, 25 घायल

सावन के पावन महीने में बड़ा हादसा, प्रशासन की नाकामी सवालों के घेरे में

उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में रविवार को सावन के तीसरे रविवार पर एक भीषण भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसे का कारण अफवाह, अव्यवस्थित भीड़ और खराब प्रबंधन बताया जा रहा है। यह हादसा उस समय हुआ जब मंदिर परिसर की संकरी सीढ़ियों पर भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए एकत्र थे।


कैसे हुआ हादसा? अफवाह ने फैलाई दहशत

सुबह करीब 9 बजे, जब हजारों श्रद्धालु मंदिर की सीढ़ियों से होकर दर्शन के लिए बढ़ रहे थे, तभी बिजली के पोल पर शॉर्ट सर्किट की अफवाह फैल गई। इससे लोग घबरा गए और बेकाबू भीड़ ने भगदड़ का रूप ले लिया। कुछ श्रद्धालु सीढ़ियों से गिर पड़े, वहीं कई एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते-गिरते नजर आए।

हालांकि पुलिस ने करंट फैलने की अफवाह को सिरे से खारिज कर दिया है, लेकिन चश्मदीदों का कहना है कि एक बिजली के खंभे के पास अचानक चिंगारी दिखी, जिससे घबराहट फैली।


भीड़ नियंत्रण में क्यों हुई चूक?

मनसा देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं के पास दो विकल्प होते हैं — रोप-वे और पैदल मार्ग। अधिकतर लोग पैदल मार्ग से मंदिर तक पहुंचते हैं, जिसमें संकरी 12 से 16 फीट चौड़ी सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है। समस्या तब बढ़ जाती है जब आने और जाने का एक ही रास्ता होता है।

इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए आने-जाने का कोई अलग मार्ग निर्धारित नहीं किया गया था। हजारों लोग एक ही रास्ते से ऊपर जा रहे थे और नीचे आ रहे थे, जिससे जाम की स्थिति बन गई।


कौन है जिम्मेदार? प्रशासन या मंदिर कमेटी?

मंदिर समिति के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भीड़ की जिम्मेदारी उनकी नहीं है और उन्होंने तो लोगों को बचाने में मदद की। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि श्रद्धालु जिस रास्ते से जा रहे थे, उसी से लौट भी रहे थे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

वहीं वन विभाग, जिसके अधीन मंदिर क्षेत्र आता है, ने जांच का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ की सूचना समय पर मिली थी, लेकिन कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई।

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हरिद्वार पुलिस का देर से एक्शन

इस हादसे में हरिद्वार पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब पुलिसकर्मी मौके पर तैनात थे, तो भीड़ बढ़ने पर समय रहते नियंत्रण क्यों नहीं किया गया? SSP धर्मेंद्र सिंह ने अब यह घोषणा की है कि एकल मार्ग (one-way system) की व्यवस्था लागू की जाएगी और जांच के आदेश दे दिए गए हैं।


क्या यह हादसा रोका जा सकता था?

हरिद्वार में सावन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है। शनिवार और रविवार जैसे छुट्टियों वाले दिन भीड़ का आंकड़ा और बढ़ जाता है। बावजूद इसके, मंदिर प्रशासन, पुलिस और वन विभाग द्वारा कोई ठोस पूर्व तैयारी नहीं की गई। यह हादसा दर्शाता है कि भीड़ प्रबंधन की योजना या तो थी नहीं या नाकाफी थी


मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर दुख जताया है और मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। उन्होंने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दे दिए हैं।


निष्कर्ष: क्या अब सबक मिलेगा?

हरिद्वार का यह हादसा एक और चेतावनी है कि भारत में धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है। अक्सर देखा जाता है कि हादसे के बाद ही व्यवस्थाएं सुधारी जाती हैं। यदि पहले से ही एकल मार्ग व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, और आपातकालीन योजना होती, तो शायद ये 8 जानें बचाई जा सकती थीं।

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