हरिद्वार: महिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही, भर्ती से इनकार पर फर्श पर हुई गर्भवती महिला की डिलीवरी

भर्ती से इनकार पर फर्श पर हुई गर्भवती महिला की डिलीवरी

उत्तराखंड के हरिद्वार से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक गरीब परिवार की गर्भवती महिला को महिला अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। मजबूरी में महिला ने फर्श पर ही बच्चे को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर और नर्सों ने मदद करने के बजाय अमानवीय व्यवहार किया। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।


भर्ती से इनकार, फर्श पर हुई डिलीवरी

घटना शुक्रवार देर रात की बताई जा रही है। पीड़ित महिला के परिजनों ने बताया कि वे गर्भवती महिला को दर्द बढ़ने पर महिला अस्पताल लेकर आए थे। लेकिन ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्स ने भर्ती करने से मना कर दिया। आरोप है कि स्टाफ ने महिला को अस्पताल से बाहर निकाल दिया। इसके बाद महिला को फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला जमीन पर बैठी दर्द से तड़प रही है, लेकिन आसपास मौजूद कोई भी अस्पतालकर्मी उसकी मदद करने को तैयार नहीं है।


परिजनों का आरोप: “डॉक्टर ने कहा- और बच्चा पैदा करेगी?”

महिला के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल स्टाफ का व्यवहार बेहद असंवेदनशील और अमानवीय था। पीड़िता की ननद सोनी ने मीडिया को बताया:
“जब हम अस्पताल पहुंचे तो किसी ने बेड देने से मना कर दिया। डिलीवरी होने के बाद डॉक्टर और नर्स ने तंज कसते हुए कहा- ‘…और बच्चा पैदा करेगी?’ क्या कोई ऐसे बोलता है? यहां लोग मदद की उम्मीद में आते हैं, न कि अपमान सहने के लिए।”

सोनी ने आगे कहा कि अगर बच्चे को कुछ हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? उन्होंने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे और भविष्य में किसी अन्य महिला के साथ ऐसा व्यवहार न हो।


वीडियो वायरल, अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि गर्भवती महिला अस्पताल के फर्श पर पड़ी है और दर्द से कराह रही है, लेकिन डॉक्टर-स्टाफ उसके पास जाकर मदद नहीं कर रहे। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।


सीएमओ ने जांच के दिए आदेश

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ आरके सिंह) ने मामले पर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा:
“मेरे संज्ञान में मामला आया है। जानकारी के अनुसार, महिला को रात करीब 9:30 बजे अस्पताल में लाया गया था और उसे इमरजेंसी रूम में एडमिट भी किया गया था। डिलीवरी का समय बाद में था और करीब 1:30 बजे डिलीवरी हुई। वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।”

सीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि गायनोकॉलॉजिस्ट से बात करने पर अस्पताल पक्ष ने आरोपों से इनकार किया है।


उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

हरिद्वार की यह घटना उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में गर्भवती महिला को बुनियादी सुविधा तक न मिलना गंभीर चिंता का विषय है।


निष्कर्ष

हरिद्वार महिला अस्पताल की यह घटना न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर भी गहरा सवाल उठाती है। गर्भवती महिला को समय पर इलाज और सम्मानजनक व्यवहार न मिलना बेहद शर्मनाक है। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो की जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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