हैदराबाद में दो ऑटो चालकों की मौत का मामला: डॉक्टर का निकला कनेक्शन
हैदराबाद में दो ऑटो-रिक्शा चालकों की अचानक हुई संदिग्ध मौत ने पुलिस और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया। करीब 25 और 29 वर्ष के दोनों चालक 2-3 दिसंबर की रात एक फ्लाईओवर के नीचे खड़े ऑटो में मृत पाए गए थे। मौके से मिली सिरिंज और एनेस्थीसिया इंजेक्शन ने ड्रग ओवरडोज की आशंका को और मजबूत कर दिया।
इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन, उनके असिस्टेंट, एक वार्ड बॉय और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है।
घटना स्थल से मिले अहम सुराग
चंद्रयानगुट्टा पुलिस को दो लाशों के साथ ऑटो में कुछ सिरिंज और एनेस्थीसिया की वायल मिली, जो आमतौर पर ऑपरेशन थियेटर में ही उपयोग की जाती हैं। इससे स्पष्ट हुआ कि दवा अस्पताल से अवैध रूप से बाहर लाई गई थी।
पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और जल्द ही पता चला कि इस मामले में अस्पताल के स्टाफ का हाथ है।
वार्ड बॉय ने चोरी किए एनेस्थीसिया इंजेक्शन
जांच में वार्ड बॉय ने स्वीकार किया कि
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उसने 26 नवंबर को अपनी ड्यूटी के दौरान एनेस्थीसिया के चार एम्पूल चोरी किए।
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अगले ही दिन उसने यह दवा एक जान-पहचान वाले व्यक्ति को बेच दी।
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उसी ने आगे यह इंजेक्शन दोनों ऑटो चालकों को उपलब्ध कराए।
पुलिस के अनुसार, दवा इतनी पावरफुल थी कि गलत तरीके से लेने पर व्यक्ति की तुरंत मौत हो सकती है – जो इस केस में हुआ भी।
डॉक्टर और असिस्टेंट की बड़ी लापरवाही
वार्ड बॉय की स्वीकारोक्ति के बाद जांच अस्पताल तक पहुंची। पुलिस के अनुसार:
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26 नवंबर को अस्पताल में न्यूरोसर्जन ने एक मरीज की ब्रेन सर्जरी की थी।
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ऑपरेशन के बाद बची हुई दवा को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
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एनेस्थीसिया की वायल को ओटी में ही खुला छोड़ दिया गया, जिसका फायदा उठाकर वार्ड बॉय ने उसे चुरा लिया।
पुलिस ने डॉक्टर और उनके असिस्टेंट पर लापरवाही और संवेदनशील दवाओं को सुरक्षित न रखने का आरोप लगाया है। यह चूक आगे चलकर दोनों ऑटो चालकों की मौत का कारण बनी।
गिरफ्तार हुए सभी आरोपी
पुलिस ने इस मामले में जिन 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें शामिल हैं—
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अस्पताल के चेयरमैन और एमडी (न्यूरोसर्जन)
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डॉक्टर का असिस्टेंट (नर्सिंग छात्रा)
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वार्ड बॉय (दवा चोरी करने वाला)
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दवा खरीदने-बेचने वाला मध्यस्थ
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डोज देकर ऑटो चालकों तक पहुंचाने वाला व्यक्ति
कैसे हुई मौत? पुलिस की शुरुआती रिपोर्ट
पुलिस का कहना है कि दोनों ऑटो चालक
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मजे या प्रयोग के तौर पर दवा का इस्तेमाल कर रहे थे,
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लेकिन एनेस्थीसिया का डोज बेहद अधिक हो गया,
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इससे तुरंत सांस रुकने और दिल की धड़कन बंद होने जैसी स्थिति बन गई,
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और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
मामला क्यों है गंभीर?
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यह मामला न सिर्फ दवा चोरी, बल्कि अस्पताल की सुरक्षा लापरवाही का खुला उदाहरण है।
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संवेदनशील दवाओं का गलत हाथों में जाना जानलेवा साबित हुआ।
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डॉक्टर जैसे संवेदनशील पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी चूक ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच जारी, और गिरफ्तारी हो सकती है
पुलिस अस्पताल प्रबंधन, दवा स्टोर रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। संभावना है कि इस मामले में और भी नाम सामने आएं।
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