अलवर में EV कार बंद, ई-रिक्शे ने दिखाई ‘पावर’
राजस्थान के अलवर से एक अनोखा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की वास्तविक स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। दरअसल, 15 लाख रुपये की टाटा नेक्सन ईवी कार बीच सड़क पर अचानक बंद हो गई, क्योंकि उसकी बैटरी डिस्चार्ज हो गई थी।
इसके बाद कार मालिक ने एक ई-रिक्शे को बुलाया और उसने रस्सी के सहारे कार को खींचकर घर तक पहुंचाया। यह घटना अलवर के काला कुआं क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां यह नजारा देखने वालों के लिए किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था।
बीच सड़क पर बंद हुई 15 लाख की कार
जानकारी के अनुसार, अलवर निवासी व्यापारी सुभाष अग्रवाल कुछ दिन पहले ही अपनी नई टाटा नेक्सन ईवी लेकर आए थे। शुक्रवार को जब वे अपनी कार लेकर ज्योति राव फूले सर्किल के पास पहुंचे, तभी अचानक कार की बैटरी खत्म हो गई और गाड़ी बीच सड़क पर रुक गई। उन्होंने कार को दोबारा स्टार्ट करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन वाहन चालू नहीं हुआ। इससे सड़क पर जाम लग गया और राहगीरों को परेशानी होने लगी। मजबूरी में सुभाष अग्रवाल ने पास से गुजर रहे एक ई-रिक्शा चालक को मदद के लिए बुलाया।
ई-रिक्शे ने दिखाई ताकत, घर तक पहुंचाई EV
ई-रिक्शा चालक ने पहले तो थोड़ी झिझक दिखाई, लेकिन फिर मदद के लिए तैयार हो गया। उसने अपनी डेढ़ लाख की ई-रिक्शा से रस्सी बांधकर 15 लाख की इलेक्ट्रिक कार को खींचा और कुछ किलोमीटर तक खींचते हुए मालिक के घर तक पहुंचाया। रास्ते में यह नजारा देखने के लिए लोग रुक गए। कई लोगों ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जो अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर छाया वीडियो
इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो गया है। लोग इसे देखकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं —
किसी ने लिखा, “अब ई-रिक्शा ही असली EV साबित हुआ,”
तो किसी ने कहा, “15 लाख की कार को खींच रही 1.5 लाख की सवारी — यही है भारत की सच्चाई।”
कई यूजर्स ने सरकार और वाहन कंपनियों से सवाल भी किए हैं कि जब इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो चार्जिंग स्टेशनों की कमी क्यों है?
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर उठे सवाल
सरकार लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है और कंपनियां भी नए-नए मॉडल बाजार में उतार रही हैं। लेकिन चार्जिंग स्टेशन की कमी आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अभी कई शहरों में चार्जिंग प्वाइंट सीमित हैं और दूरदराज के इलाकों में तो ऐसी कोई सुविधा मौजूद ही नहीं। कई बार लोग लंबी दूरी तय करते समय चार्जिंग की कमी के कारण फंस जाते हैं, जैसा कि अलवर में हुआ। वाहन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर समय पर नहीं बढ़ाया गया, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता प्रभावित हो सकती है।
कार कंपनियों से बेहतर समाधान की उम्मीद
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईवी वाहनों के साथ मोबाइल चार्जिंग यूनिट या आपातकालीन रिचार्जिंग सर्विस जैसी सुविधाएं शुरू की जानी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। इसके अलावा, कंपनियों को ग्राहकों को बैटरी लाइफ और चार्जिंग प्रबंधन के बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश देने चाहिए।
निष्कर्ष
अलवर की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि भारत में ईवी तकनीक भले तेज़ी से आगे बढ़ रही हो, लेकिन चार्जिंग व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी मजबूत नहीं है। 15 लाख की कार को ई-रिक्शे से घर तक खींचे जाने का यह दृश्य जहां मजाकिया लग सकता है, वहीं यह देश की ईवी नीति और तैयारी की हकीकत भी उजागर करता है।
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