सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, हत्या के मामले में काट रहा था उम्रकैद की सजा
नागपुर/मुंबई – अंडरवर्ल्ड डॉन और पूर्व विधायक अरुण गवली (Arun Gawli) को 18 साल बाद जेल से रिहाई मिल गई है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद गवली को नागपुर सेंट्रल जेल से छोड़ा गया। रिहाई के बाद वह कड़ी सुरक्षा के बीच नागपुर एयरपोर्ट पहुंचा और वहां से मुंबई के लिए रवाना हुआ।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, एटीएस भी रही मौजूद
गवली की रिहाई को देखते हुए जेल परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) की टीम भी सुरक्षा के लिहाज से मौके पर मौजूद रही। जेल से बाहर आते ही गवली को सीधे नागपुर एयरपोर्ट ले जाया गया, जहां पहले से ही उसका परिवार और करीबी रिश्तेदार इंतजार कर रहे थे।
एयरपोर्ट पर मीडिया का भारी जमावड़ा भी देखने को मिला, लेकिन गवली ने किसी भी सवाल का जवाब देने से परहेज किया।
कमलाकर जमसांदेकर हत्याकांड में हुई थी सजा
अरुण गवली को मुंबई के शिवसेना पार्षद कमलाकर जमसांदेकर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। यह हत्या 2008 में हुई, और 2012 में मुंबई सत्र न्यायालय ने गवली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के बाद से गवली को नागपुर सेंट्रल जेल में रखा गया था, जहां वह पिछले 18 वर्षों से बंद था।
राजनीति में भी आजमाया था किस्मत
अंडरवर्ल्ड में खौफ का पर्याय माने जाने वाले अरुण गवली ने राजनीति में भी दस्तक दी थी। वर्ष 2004 में वह मुंबई की भायखला विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बना था। राजनीति में उसका प्रवेश खासा चर्चा में रहा, और तब से उसका नाम सिर्फ अपराध से नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों से भी जुड़ने लगा।
गवली की रिहाई पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
गवली की रिहाई केवल एक कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक हलचल का भी कारण बन गई है। महाराष्ट्र की राजनीति में गवली का नाम पहले भी चर्चा में रहा है, और अब 2024 लोकसभा चुनावों के बाद की स्थिति में उसकी मौजूदगी को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गवली की वापसी कुछ क्षेत्रों में स्थानीय समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
पुलिस की नजर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
अरुण गवली की रिहाई के बाद मुंबई पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने उस पर करीबी निगरानी शुरू कर दी है। उसकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। गवली का नाम मुंबई अंडरवर्ल्ड के कई चर्चित मामलों से जुड़ा रहा है और अब जब वह बाहर है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक संवेदनशील मसला बन गया है।
मीडिया से बनाई दूरी, चुपचाप रवाना
जेल से रिहा होने के बाद अरुण गवली ने मीडिया से दूरी बनाए रखी। न तो उसने किसी पत्रकार के सवाल का जवाब दिया और न ही कोई बयान दिया। उसके साथ उसके भाई और कुछ करीबी रिश्तेदार जरूर नजर आए, लेकिन सभी बेहद चुपचाप ढंग से नागपुर एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से मुंबई के लिए उड़ान भरी।
निष्कर्ष: अब क्या होगा गवली का अगला कदम?
अरुण गवली की रिहाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह आगे क्या करेगा? क्या वह राजनीति में वापसी करेगा? क्या वह पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखेगा? या फिर उसकी निगरानी के बावजूद कोई नई कहानी शुरू होगी?
फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और आम जनता भी इस पर नजर बनाए हुए है।
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