31 जुलाई 1940: शहीद उधम सिंह को दी गई थी फांसी, 34 साल बाद भारत में हुआ अंतिम संस्कार

उधम सिंह की शहादत और उनकी कुर्बानी का इतिहास

उधम सिंह की शहादत और उनकी कुर्बानी का इतिहास

31 जुलाई 1940 को शहीद उधम सिंह को ब्रिटिश सरकार ने पेंटनविले जेल में फांसी दी थी। यह दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी की शहादत का प्रतीक है, जिसने जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लिया और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। उधम सिंह ने पंजाब के अमृतसर में 1919 में हुए इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार रहे माइकल ओ डायर की हत्या कर दी थी।

जलियांवाला बाग नरसंहार और ओ डायर की हत्या

1919 में जलियांवाला बाग में हुई नरसंहार ने न केवल भारतीयों के दिलों में गुस्से की लहर पैदा की, बल्कि यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक अहम मोड़ के रूप में दर्ज हुई। उधम सिंह ने इस घटना का बदला लेने के लिए 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में माइकल ओ डायर की हत्या कर दी थी। ओ डायर, जो कभी पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे, को जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।

उधम सिंह ने ओ डायर की हत्या के लिए सही अवसर का इंतजार किया। उन्होंने कई देशों का भ्रमण किया और अंततः इंग्लैंड पहुंचे, जहां उन्होंने अपने मंसूबे को अंजाम दिया। इस कृत्य के बाद वह ब्रिटिश अधिकारियों के निशाने पर आ गए, और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

उधम सिंह को कब दी गई थी फांसी?

31 जुलाई 1940 को उधम सिंह को पेंटनविले जेल में फांसी दी गई। इस दिन को भारतीय इतिहास में शहीद उधम सिंह की शहादत के रूप में याद किया जाता है। उधम सिंह की यह शहादत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक मील का पत्थर साबित हुई, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ भारतीयों की संघर्ष की भावना को और भी प्रबल किया।

उधम सिंह का जन्म और नामकरण

उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले में हुआ था। उनका असली नाम शेर सिंह था, लेकिन 1933 में पासपोर्ट बनवाने के दौरान उन्होंने अपना नाम उधम सिंह रखा, जो अब उनके साथ हमेशा के लिए जुड़ गया। उधम सिंह का नाम पहले उदय सिंह भी था। जब उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह करने की ठानी, तो उन्होंने अपना नाम बदलकर उधम सिंह रखा।

उधम सिंह की गिरफ्तारी और जेल में स्थिति

ओ डायर की हत्या के बाद उधम सिंह को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार होने के बाद, उधम सिंह ने खुद को मुहम्मद सिंह बताया और उनके द्वारा लिखे गए सभी पत्रों पर इसी नाम के हस्ताक्षर थे। गिरफ्तारी के बाद, उन्हें पेंटनविले जेल में बंद कर दिया गया, जहां 31 जुलाई 1940 को उन्हें फांसी दे दी गई।

उधम सिंह का अंतिम संस्कार और उनकी कब्र

उधम सिंह को फांसी देने के बाद उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी नहीं होने दी गई थी। उन्हें मदन लाल ढींगरा की कब्र के पास दफनाया गया, जिनकी 1909 में फांसी दी गई थी। डॉ. नवतेज सिंह अपनी किताब “द लाइफ ऑफ शहीद उधम सिंह” में लिखते हैं कि उधम सिंह की कब्र पर “US” शब्द अंकित था।

उधम सिंह के अवशेष भारत लाए गए

भारत की स्वतंत्रता के बाद, 19 जुलाई 1974 को उधम सिंह के अवशेषों को ब्रिटेन से भारत लाया गया। उनके अवशेषों को 2 अगस्त 1974 को सात कलशों में विभाजित किया गया और विभिन्न स्थानों पर उनका विसर्जन किया गया। इस तरह, उधम सिंह की शहादत के बाद 34 साल बाद उनका अंतिम संस्कार भारत में किया गया।

निष्कर्ष:

उधम सिंह का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक अमिट छाप छोड़ गया। उन्होंने अपनी जान की कीमत पर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अपने कर्तव्यों को निभाया। उनकी शहादत को भारतीय जनमानस हमेशा याद रखेगा और वह हमेशा हमारे दिलों में एक नायक के रूप में जीवित रहेंगे।

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