दिल्ली में बुलडोजर एक्शन: कालकाजी की 1300 झुग्गियां ढहाई गईं, हजारों लोग हुए बेघर

कालकाजी में बुलडोजर चला, लोगों की गुहार अनसुनी

नई दिल्ली: दिल्ली के कालकाजी इलाके में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में 1300 से अधिक झुग्गियों पर बुलडोजर चला दिया। यह झुग्गियां ‘भूमिहीन कैंप’ में स्थित थीं, जहां लगभग 10,000 लोग रहते थे। जैसे ही सुबह 4 बजे बुलडोजर की आवाज आई, लोग नींद से जागे और बाहर निकल आए। कई लोग तो अपने सामान तक नहीं निकाल पाए।

2300 से ज्यादा परिवार प्रभावित

DDA की इस कार्यवाही से करीब 2300 परिवार प्रभावित हुए हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें से 1862 परिवारों को पहले ही दो साल पहले कालकाजी एक्सटेंशन, पॉकेट A में बने फ्लैट आवंटित किए गए थे, लेकिन फिर भी हजारों लोग इन झुग्गियों में रह रहे थे। इन झुग्गियों में अधिकतर लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से आकर बसे थे, जो ऑटो, ई-रिक्शा चलाकर या फुटपाथ पर दुकान लगाकर रोजी-रोटी कमाते थे।

पक्के मकानों जैसे बन चुके थे झुग्गियां

स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां की झुग्गियां अब केवल अस्थायी झोपड़ियां नहीं थीं, बल्कि पक्के मकानों में बदल चुकी थीं। हर झुग्गी दो मंजिल की थी और उनमें किराएदार भी रहते थे। DDA ने 6 जून को नोटिस जारी किया था कि सभी झुग्गी निवासी 10 जून तक स्थान खाली कर दें, लेकिन ज्यादातर लोग अपनी झुग्गियों को छोड़ने को तैयार नहीं थे।

सुबह 4 बजे शुरू हुई कार्रवाई

बुधवार को सुबह 4 बजे 8 बुलडोजर भारी सुरक्षा के साथ पहुंचे। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई थी ताकि किसी भी विरोध-प्रदर्शन को रोका जा सके। सुबह 5 बजे से 10 बजे तक लगातार झुग्गियों को तोड़ा गया और देखते ही देखते पूरा इलाका मलबे में तब्दील हो गया।

कोर्ट से नहीं मिला राहत

इसी दिन बटला हाउस इलाके में प्रस्तावित विध्वंस को लेकर आप विधायक अमानतुल्लाह खान द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कोई राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस गिरीश कथपालिया और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि इस तरह की जनहित याचिका में आम आदेश पारित करना, व्यक्तिगत मामलों को प्रभावित कर सकता है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली।

कुछ को मिला राहत, कुछ अब भी असमंजस में

कोर्ट ने यह भी माना कि कुछ प्रभावित लोगों को राहत मिल चुकी है, जबकि कई अन्य अभी भी उचित कानूनी कदम उठा सकते हैं। DDA की तरफ से पेश हुई वकील शोभना ताकियार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही कार्रवाई हो रही है और PIL इस मामले में मान्य नहीं है।

निष्कर्ष:

दिल्ली में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई तेजी से बढ़ रही है। हालांकि सरकार का दावा है कि केवल अवैध निर्माण पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन हजारों गरीब परिवारों के बेघर होने से मानवीय संकट खड़ा हो गया है। कालकाजी की यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अभी भी भूमिहीन कैंप में रह रहे हैं। अब नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार इनके लिए पुनर्वास की कोई व्यवस्था करती है या नहीं।

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