अहमदाबाद विमान हादसा: लंदन जाने से पहले भाई को किया आखिरी फोन, नहीं गई साथ 15 साल की बेटी, आगरा में छाया मातम

AI-171 विमान हादसे में आगरा के नीरज लवानियां और उनकी पत्नी की मौत, बेटी संयोगवश बची

गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार को हुआ भीषण विमान हादसा पूरे देश को गहरे सदमे में डाल गया। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171, जो अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुई थी, टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दर्दनाक हादसे में 200 से अधिक यात्रियों की मौत हो चुकी है। इसी विमान में सवार थे आगरा के नीरज लवानियां और उनकी पत्नी, जिनकी इस हादसे में मौत हो गई।


बेटी नहीं गई साथ, टल गया बड़ा संकट

नीरज लवानियां वडोदरा की फेदर स्काई विलास कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहते थे और एक कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। वे अपनी पत्नी के साथ लंदन घूमने के लिए जा रहे थे। उनकी 15 साल की बेटी किसी कारणवश इस यात्रा में साथ नहीं जा सकी और घर पर ही रह गई। यही संयोग उसकी जान बचाने का कारण बन गया।


आखिरी बार भाई को किया था फोन

परिवार के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 9 बजे नीरज लवानियां ने अपने भाई सतीश को फोन कर बताया था कि वे टैक्सी से एयरपोर्ट के लिए रवाना हो चुके हैं। यह कॉल उनके भाई के साथ आखिरी संवाद बन गया। इसके बाद से परिजन और रिश्तेदारों का नीरज से कोई संपर्क नहीं हो सका।


हादसे की खबर से अकोला में पसरा मातम

जैसे ही हादसे की खबर सामने आई और मृतकों की सूची में नीरज लवानियां और उनकी पत्नी का नाम आया, आगरा के अकोला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल है। पास-पड़ोस के लोग सांत्वना देने पहुंच रहे हैं, लेकिन घर में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है।


सरकार कर रही डीएनए पहचान की प्रक्रिया

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, शवों की हालत इतनी खराब है कि पहचान संभव नहीं हो पा रही है। इसके लिए डीएनए जांच प्रक्रिया शुरू की जा रही है। परिवारों को उनके अपनों के शव सौंपने में कुछ दिन का समय लग सकता है।


निष्कर्ष: एक फोन कॉल, एक अधूरी यात्रा और एक बची हुई जान

नीरज लवानियां की यह कहानी न सिर्फ अहमदाबाद विमान हादसे की भयावहता को दिखाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जीवन कितना अनिश्चित हो सकता है। एक तरफ आखिरी फोन कॉल की यादें रह गईं, तो दूसरी ओर उनकी बेटी की बचती हुई जान एक चमत्कार से कम नहीं है।

Disclaimer: यह लेख प्राप्त आधिकारिक जानकारियों और पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया पर आधारित है।

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