अमेरिका-NATO की टैरिफ धमकियों का केंद्रीय मंत्री ने दिया करारा जवाब, भारत का खड़ा बयान

भारत ने दिया अमेरिका और NATO की धमकियों को नकारात्मक जवाब

 

भारत ने दिया अमेरिका और NATO की धमकियों को नकारात्मक जवाब

भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका और NATO की धमकियों का मजबूती से जवाब दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अपने ऊर्जा आपूर्ति के फैसले में स्वतंत्र है और हम अपनी आवश्यकताओं के अनुसार तेल खरीदने में कोई संकोच नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का मुख्य फोकस भारतीय उपभोक्ताओं के हितों पर है और देश अपनी नीति पर कायम रहेगा।

भारत का स्पष्ट रुख

पेट्रोलियम मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। अमेरिका और NATO द्वारा लगाए गए टैरिफ धमकियों के बावजूद, भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्वतंत्र रहेगा। हरदीप पुरी ने कहा कि “हम बहुत शुरुआत से ही इस बात को लेकर स्पष्ट थे कि हमें जहां से भी तेल खरीदना होगा हम खरीदेंगे।” उन्होंने रूस से तेल खरीदने के बाद आए टैरिफ धमकियों को नकारते हुए कहा कि “हमने अपने फैसले में किसी दबाव को नहीं माना है।”

NATO और अमेरिका की धमकियों पर प्रतिक्रिया

नाटो प्रमुख मार्क रूट ने कहा था कि अगर भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता है तो उस पर 100% सेकेंडरी सैंक्शन लगाया जा सकता है। इसका असर भारत की तेल आपूर्ति और व्यापार पर हो सकता था। लेकिन केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि भारत अपने तेल सप्लाई में विविधता लाने में सफल रहा है और अब हम 40 देशों से तेल खरीद रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 27 थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस से तेल खरीदना भारत के लिए एक स्वाभाविक और आवश्यक कदम है।

भारत की ऊर्जा नीति और वैश्विक संदर्भ

भारत की ऊर्जा नीति पर केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि भारत ने हमेशा अपने नागरिकों की ऊर्जा आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस मुद्दे पर कहा कि “हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हमारे लोगों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है और हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि वैश्विक परिस्थितियों का ध्यान रखते हुए हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।”

भारत की विदेश नीति और तेल आपूर्ति की विविधता

हरदीप सिंह पुरी ने यह भी बताया कि भारत ने तेल आपूर्ति में विविधता लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद भारत ने अपनी आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीदारी बढ़ाई है। इससे पहले, भारत रूस से अपनी कुल तेल आवश्यकता का 2% ही खरीदता था, लेकिन अब यह संख्या काफी बढ़ गई है।

ईरानी कच्चे तेल पर भारत का रुख

पेट्रोलियम मंत्री ने ईरानी कच्चे तेल के बारे में भी बात की और कहा कि यदि ईरानी तेल पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाया गया है, तो भारत उसे खरीदने में संकोच करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है।

यह भी पढ़ें:  भारत ने नाटो चीफ की चेतावनी को नकारा, कहा- ‘डबल स्टैंडर्ड नहीं अपनाएं’

अमेरिकी और NATO का दवाब

अमेरिका और NATO ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दवाब डाला है, क्योंकि वे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए वित्तीय समर्थन देने का आरोप लगाते हैं। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल खरीदने से बचें, लेकिन भारत ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा।

निष्कर्ष

भारत ने अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के सामने नहीं झुकेगा और अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लेता रहेगा। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह से भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। अमेरिका और NATO की धमकियां भारत की विदेश नीति को प्रभावित नहीं कर सकतीं।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *