सीमा क्षेत्र में लगातार गूंज रही तोपों की आवाज, सम्रोंग शहर तक पहुंचा धमाकों का असर
सम्रोंग/बैंकॉक – थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। रविवार को संघर्ष का चौथा दिन रहा और दोनों देशों की सेनाएं अब भी आमने-सामने डटी हुई हैं। सीजफायर की तमाम अपीलें और कूटनीतिक प्रयास असफल साबित हो रहे हैं, जबकि सीमा पर भारी तोपों से गोलाबारी जारी है।
रविवार सुबह फिर भड़का संघर्ष
रविवार तड़के एक बार फिर सीमा पर गोलाबारी और धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। खास बात यह रही कि कंबोडिया के सम्रोंग शहर, जो सीमा से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है, वहां भी धमाकों की गूंज साफ सुनाई दी। इससे यह साफ हो जाता है कि संघर्ष अब केवल बॉर्डर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका नागरिक इलाकों पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रात से ही सैन्य गतिविधियां तेज हो गई थीं और सुबह होते-होते तोपों और मोर्टार से हमले शुरू हो गए। लोग अपने घरों में कैद हैं और शहर में डर का माहौल है।
सीजफायर की कोशिशें नाकाम, तनाव बरकरार
हाल के दिनों में अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन दोनों देशों से संघर्ष विराम की अपील कर चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हस्तक्षेप करते हुए शांति वार्ता के लिए दोनों देशों के नेताओं से बात की थी। हालांकि, रविवार की ताजा गोलाबारी से यह साफ हो गया कि जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आया है।
कंबोडिया और थाईलैंड दोनों ही देश एक-दूसरे पर संघर्ष शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं। अब तक दोनों पक्षों के दर्जनों सैनिक और आम नागरिक इस झड़प में मारे जा चुके हैं और 1.3 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
प्रीह विहेयर मंदिर विवाद बना संघर्ष का कारण
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रहा यह विवाद मुख्य रूप से 817 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा को लेकर है। खासकर प्रीह विहेयर मंदिर, जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है, विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने यह मंदिर कंबोडिया को सौंप दिया था, लेकिन थाईलैंड ने इस फैसले को कभी पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया। नतीजतन, यह क्षेत्र लंबे समय से दोनों देशों के बीच तनाव और झड़पों का कारण बनता रहा है।
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कूटनीतिक समाधान की अपील, लेकिन जमीनी हालात गंभीर
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस संघर्ष को लेकर आपात बैठक बुलाई है, जिसमें दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिये समाधान निकालने की अपील की गई है। भारत, अमेरिका, चीन और ASEAN देशों ने भी शांति और स्थिरता बनाए रखने का आग्रह किया है।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सीमा की स्पष्ट रेखांकन प्रक्रिया और ऐतिहासिक स्थलों पर समझौता नहीं होता, तब तक यह संघर्ष थमता नहीं दिख रहा।
निष्कर्ष: हालात बेहद नाजुक
थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद अब केवल सैन्य झड़प नहीं रहा, यह मानवीय संकट में बदलता जा रहा है। हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं और कई निर्दोष नागरिकों की जान जा चुकी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस पर टिकी हैं, लेकिन जब तक दोनों देशों की सरकारें राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखातीं, तब तक शांति की उम्मीद कम ही नजर आती है।