भारत-अमेरिका टकराव: इतिहास गवाह है, भारत कभी दबाव में नहीं झुका

इतिहास गवाह है, भारत कभी दबाव में नहीं झुका

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और अमेरिकी दबाव

भारत और अमेरिका के रिश्ते कई बार ऐसे मोड़ पर पहुंचे हैं, जहां वॉशिंगटन ने भारत पर आर्थिक, कूटनीतिक या सैन्य दबाव डालने की कोशिश की। परंतु हर बार भारत ने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए अपने आत्मसम्मान और स्वतंत्र विदेश नीति से कोई समझौता नहीं किया।


1965: अमेरिका की गेहूं रोकने की धमकी और भारत की हिम्मत

1965 में भारत खाद्य संकट से जूझ रहा था। मॉनसून कमजोर रहा और देश में सूखे जैसे हालात थे। इस समय भारत अमेरिका की पीएल-480 योजना के तहत गेहूं आयात कर रहा था।

जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया, तो अमेरिका ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को धमकी दी कि अगर युद्ध बंद नहीं किया गया तो गेहूं की आपूर्ति रोक दी जाएगी।

शास्त्री जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “बंद कर दीजिए गेहूं देना।”

इसके बाद उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली की और “जय जवान, जय किसान” का नारा दिया, जिससे हरित क्रांति की नींव पड़ी। यह वह दौर था जब भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला ठोस कदम बढ़ाया।


1974 और 1998: परमाणु परीक्षणों पर अमेरिकी प्रतिबंध

1974 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया। अमेरिका ने इसके जवाब में परमाणु ईंधन और तकनीकी सहायता पर रोक लगा दी। फिर भी भारत नहीं झुका।

1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पोखरण-II परमाणु परीक्षण किया। अमेरिका ने फिर से आर्थिक और सैन्य प्रतिबंध लगा दिए। इसके बावजूद भारत ने आत्मरक्षा के लिए परमाणु शक्ति को जरूरी बताया और ‘विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध’ (Credible Minimum Deterrence) नीति अपनाई।

तब भारत के विदेश मंत्री जसवंत सिंह और अमेरिका के स्ट्रोब टैलबोट के बीच लंबी बातचीत चली। अंततः अमेरिका को यह समझ में आ गया कि भारत को अलग-थलग करना संभव नहीं है। 2000 में बिल क्लिंटन की भारत यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से सामान्य किया।


अब ट्रेड वॉर: 25% टैरिफ का नया हथियार

2025 में अमेरिका ने एक बार फिर भारत पर दबाव बनाना शुरू किया है। जनवरी से जुलाई के बीच कई दौर की बातचीत विफल रही, जिसके बाद अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। ये टैरिफ 7 अगस्त से लागू होंगे।

भारत ने साफ किया है कि वह अमेरिका की शर्तें नहीं मानेगा। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत जवाबी टैरिफ तो नहीं लगाएगा, लेकिन व्यापारियों के हितों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।


निष्कर्ष: भारत की नीति स्पष्ट है – आत्मसम्मान से समझौता नहीं

चाहे गेहूं की धमकी हो, परमाणु प्रतिबंध हो या फिर व्यापारिक टैरिफ—भारत ने हर मोर्चे पर दिखाया है कि वह केवल अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही निर्णय लेता है।

भारत की विदेश और आर्थिक नीति आज भी “रणनीतिक स्वायत्तता” और “आत्मनिर्भरता” के सिद्धांतों पर आधारित है।

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