गुजरात पर अमेरिकी टैरिफ का वार: हीरा उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित, कारोबारियों में बढ़ी चिंता

हीरा उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित, कारोबारियों में बढ़ी चिंता

25% टैरिफ और पेनल्टी से टेक्सटाइल, केमिकल, इंजीनियरिंग और फार्मा सेक्टर पर भी असर

गुजरात के उद्योगों को अमेरिका की नई टैरिफ नीति ने तगड़ा झटका दिया है। अमेरिका द्वारा 25 प्रतिशत टैरिफ और पेनल्टी लगाने की घोषणा के बाद राज्य के कई प्रमुख उद्योगों—जैसे जेम्स एंड ज्वैलरी, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग और केमिकल सेक्टर—पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष शैलेष पटवारी के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान हीरा उद्योग को होने वाला है, जबकि फार्मा उद्योग पर प्रभाव सीमित रहेगा।


हीरा उद्योग की कमर टूटने की कगार पर

गुजरात का हीरा उद्योग पहले ही मंदी की मार झेल रहा है। शैलेष पटवारी ने बताया कि जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर अमेरिका को हर साल लगभग 10 से 12 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है। ऐसे में 25% टैरिफ लगने से निर्यात लागत में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।

हीरा उद्योग में पहले ही पिछले दो वर्षों में हजारों कारीगरों की नौकरियां जा चुकी हैं, और इस फैसले के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।


फार्मा पर सीमित असर, लेकिन कीमतें बढ़ेंगी

फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री पर इसका सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि टैरिफ का बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। यानी, अमेरिका में दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी। हालांकि, इससे भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक और प्रतिस्पर्धात्मक चुनौतियाँ जरूर बढ़ सकती हैं।


टेक्सटाइल और केमिकल सेक्टर भी परेशान

टेक्सटाइल सेक्टर, जो अमेरिका समेत अन्य देशों में भी बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, को इस फैसले से बड़ा झटका लग सकता है। पटवारी के मुताबिक, अमेरिका भारतीय टेक्सटाइल्स के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है, और टैरिफ की वजह से निर्यात में गिरावट आने की आशंका है।

केमिकल इंडस्ट्री को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, खासकर चीनी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। चूंकि चीन पर भी टैरिफ लगाया गया है, ऐसे में दोनों देशों की कंपनियां अमेरिकी बाजार में सस्ते दामों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए आपस में भिड़ेंगी।


इंजीनियरिंग और ऑटो सेक्टर पर भी प्रभाव

इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर, जो अमेरिका को विभिन्न स्पेयर पार्ट्स और मशीनें सप्लाई करते हैं, वे भी टैरिफ के असर से अछूते नहीं रहेंगे। बढ़ी हुई लागत से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी और उनके लिए अमेरिकी बाजार में टिके रहना कठिन हो जाएगा।


सरकार से राहत की मांग

शैलेष पटवारी ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह इस चुनौती का समाधान निकाले। उन्होंने कहा:

“सरकार को चाहिए कि वह या तो अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौता करे या फिर उद्योगों को सब्सिडी और आसान कारोबारी माहौल प्रदान करे।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय उद्योगों ने पहले भी वैश्विक झटकों का सामना किया है और इस बार भी सरकार की मदद से इससे उबर सकते हैं।

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निष्कर्ष: रणनीतिक कदम जरूरी

अमेरिका के इस टैरिफ फैसले से गुजरात की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है। जेम्स-ज्वैलरी जैसे प्रमुख उद्योग पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और इस फैसले ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।

ऐसे में भारत सरकार को जल्द से जल्द कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर कदम उठाने होंगे, ताकि गुजरात और देश के अन्य निर्यातकों को राहत मिल सके।

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