मेरठ हत्याकांड: युवक की हत्या मामले में प्रेमिका, पिता और चाचा को उम्रकैद, बोरे में डालकर फेंका था शव

युवक की हत्या मामले में प्रेमिका, पिता और चाचा को उम्रकैद

अदालत का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की एक अदालत ने 2021 में हुए अभिषेक हत्याकांड में प्रेमिका अदिति, उसके पिता अनुज और चाचा ओंकार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने तीनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

2021 में हुई थी वारदात

यह मामला 27 मार्च 2021 का है, जब 18 वर्षीय अभिषेक अपनी प्रेमिका अदिति से मिलने उसके घर गया था। लेकिन उस रात के बाद वह घर वापस नहीं लौटा। अगले दिन सुबह अभिषेक का शव बोरे में बंद हालत में तालाब के पास मिला।

परिवार ने दर्ज कराई थी शिकायत

अभिषेक के पिता राजकुमार ने बेटे की हत्या का आरोप अदिति, उसके पिता अनुज कुमार और चाचा ओंकार सिंह पर लगाया और पुलिस से शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया और तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

अदालत ने दोषी ठहराया

चार साल तक चली सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-12 राजमंगल सिंह यादव की अदालत ने अदिति, अनुज और ओंकार को हत्या का दोषी पाया। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से अभिषेक की हत्या की और उसके शव को छुपाने के लिए बोरे में डालकर तालाब में फेंक दिया।

प्रेम संबंध बना वजह

पुलिस जांच और गवाहों के बयानों से यह साबित हुआ कि अभिषेक और अदिति एक रिश्ते में थे। परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। इसी कारण अदिति के परिजनों ने युवक को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

चार साल बाद मिला इंसाफ

करीब चार साल बाद पीड़ित परिवार को इंसाफ मिला है। अदालत के इस फैसले से पीड़ित पक्ष ने संतोष जताया और कहा कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी जरूरी थी।

समाज में संदेश

यह मामला न सिर्फ मेरठ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत के इस फैसले को समाज के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि रिश्तों और व्यक्तिगत विवादों के चलते की गई हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


निष्कर्ष

मेरठ का यह हत्याकांड एक दिल दहला देने वाला मामला था, जिसमें प्रेम संबंध की वजह से एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी। अब अदालत के फैसले ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया है और दोषियों को उम्रकैद की सजा देकर कानून ने एक बार फिर यह साबित किया है कि अपराध चाहे कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो, न्याय के दायरे से बचना संभव नहीं है।

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