डिपार्टमेंटल मीटिंग के दौरान हुआ विवाद, आरोपी प्रोफेसर निलंबित और गिरफ्तार
जोधपुर: राजस्थान के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान IIT जोधपुर में मंगलवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अविनाश अग्रवाल पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा ने हमला कर दिया, जिससे निदेशक गिर पड़े और उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। इस गंभीर घटना ने पूरे शिक्षा जगत को हिला कर रख दिया है।
कैसे हुई घटना? डिपार्टमेंट मीटिंग में हुआ हमला
घटना मंगलवार को केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की एक बैठक के दौरान हुई। बैठक में निदेशक प्रो. अविनाश अग्रवाल ने डॉ. दीपक अरोड़ा से उनके पिछले पांच वर्षों के शैक्षणिक और शोध कार्य के बारे में सवाल किए। बताया जा रहा है कि यह सवाल सुनते ही डॉ. अरोड़ा भड़क गए और बैठक से बाहर जाने के बजाय सीधे निदेशक की ओर बढ़े और उनसे मारपीट शुरू कर दी।
मारपीट के दौरान निदेशक कुर्सी से गिर गए, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई। बाद में यह पुष्टि हुई कि उनके पैर में फ्रैक्चर हुआ है। उन्हें AIIMS जोधपुर में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
कुलसचिव ने दर्ज करवाई शिकायत, केस दर्ज
घटना की जानकारी मिलते ही आईआईटी जोधपुर के कुलसचिव डॉ. अंकुर गुप्ता ने कर्वड़ थाना में डॉ. अरोड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में मारपीट, राजकार्य में बाधा डालने और अपमानजनक व्यवहार जैसे आरोप शामिल हैं।
पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर ली हैं और मामले की जांच जारी है।
आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबित और गिरफ्तार
पुलिस अधिकारी एसीपी मंडोर नागेंद्र कुमार ने बताया कि डॉ. दीपक अरोड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़ी सभी वीडियो फुटेज और चश्मदीदों के बयान एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि जांच निष्पक्ष और सटीक हो।
IIT परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने आईआईटी जोधपुर की सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक उच्चस्तरीय डिपार्टमेंटल मीटिंग के दौरान हुई यह हिंसा न केवल संस्थान की छवि को प्रभावित करती है, बल्कि अन्य प्रोफेसरों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में इस प्रकार की घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे छात्रों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
संस्थान के लिए बना बड़ी चुनौती
IIT जोधपुर जैसी प्रतिष्ठित संस्था में निदेशक के साथ ऐसी घटना होना संस्थान के लिए प्रशासनिक और नैतिक चुनौती बन गया है। उम्मीद की जा रही है कि संस्थान जल्द ही अपनी सुरक्षा नीति और आंतरिक अनुशासन प्रणाली को और सख्त बनाएगा।
निष्कर्ष: प्रोफेशनल माहौल में संयम की ज़रूरत
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि प्रोफेशनल और शैक्षणिक माहौल में संयम और संवाद की कितनी अहम भूमिका होती है। असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे हिंसा में बदल देना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि एक शिक्षण संस्थान की मर्यादा के भी विपरीत है।