आगरा, 8 सितंबर 2025 – उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में यमुना नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर से ऊपर पहुंच गया है। नदी का स्तर 500.02 फीट दर्ज किया गया है, जबकि खतरे का निशान 499 फीट है। बढ़ते जलस्तर ने शहर और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का खतरा और गहरा दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 47 सालों बाद पहली बार यमुना का पानी ताजमहल की पीछे की दीवार से टकरा रहा है।
ताजमहल के पास पानी, लेकिन संरचना सुरक्षित
यमुना का जलस्तर बढ़ने से ताजमहल के पीछे की दीवारों तक पानी पहुंच गया है। हालांकि, पुरातत्व विभाग का कहना है कि स्मारक की सुरक्षा संरचना पर कोई असर नहीं पड़ा है। फिर भी एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
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मेहताब बाग में लगभग 2 फीट पानी जमा हो गया है।
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दशहरा घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुका है और यहां श्रद्धालुओं को जल पुलिस की मदद लेनी पड़ रही है।
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अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों, जैसे इटमाद-उद-दौला, पर भी बाढ़ का असर पड़ा है।
गांवों और कस्बों में तबाही
यमुना का पानी शहर ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों और कस्बों में भी तबाही मचा रहा है।
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राजश्री कॉलोनी, अमर विहार और कैलाश मंदिर जलमग्न हो गए हैं।
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कैलाश मंदिर के गर्भगृह तक पानी पहुंच चुका है।
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कई जगहों पर 3 से 5 फीट तक पानी भर गया है, जिससे लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।
करीब 20 परिवारों ने पलायन किया है, जबकि कई इलाकों में बिजली सप्लाई बंद कर दी गई है।
प्रशासन अलर्ट पर
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बाढ़ प्रभावित और संभावित क्षेत्रों का दौरा किया और सभी विभागों को अलर्ट पर रखा है।
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मेहरा नाहरगंज में 40 से ज्यादा लोगों को विस्थापित कर प्राथमिक विद्यालय में ठहराया गया है।
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प्रशासन की ओर से खाने-पीने और राहत सामग्री की व्यवस्था की गई है।
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बाह तहसील के बटेश्वर धाम समेत कई इलाके डूब चुके हैं।
कृषि को भारी नुकसान
बाढ़ ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
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9,500 बीघा से ज्यादा फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिनमें बाजरा और हरी सब्जियां प्रमुख हैं।
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केवल बाह तहसील में ही 30,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
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प्रशासन नावों और स्टीमर के जरिए राहत सामग्री पहुंचा रहा है।
रविवार से लगातार बढ़ा जलस्तर
रविवार को यमुना का जलस्तर 499.11 फीट दर्ज किया गया था। रात तक यह लगातार बढ़कर 500 फीट से ऊपर चला गया। सोमवार रात 9 बजे यह स्तर 152.485 मीटर (लगभग 500 फीट से ज्यादा) रिकॉर्ड किया गया। यह खतरे के निशान से ऊपर है और हालात को और गंभीर बना रहा है।
47 साल बाद दोहराया गया इतिहास
स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, आगरा में 47 साल पहले ऐसी स्थिति बनी थी जब यमुना का पानी ताजमहल की दीवारों तक पहुंचा था। इस बार भी नजारा वैसा ही है, जिससे लोग चिंतित और परेशान हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ताजमहल की मजबूत नींव और संरचना इसे किसी बड़े खतरे से बचा लेगी।
निष्कर्ष
आगरा में यमुना का जलस्तर खतरनाक स्तर से ऊपर पहुंचने के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। ताजमहल समेत अन्य धरोहरों पर निगरानी रखी जा रही है, जबकि हजारों ग्रामीण और किसान प्रभावित हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है, लेकिन अगर जलस्तर और बढ़ा तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
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