फिर कोसी का कहर: डूबने की कगार पर सहरसा, सुपौल और खगड़िया — नेपाल की बारिश से बिहार में बाढ़ संकट गहराया

नेपाल में भारी बारिश के बाद कोसी, कमला बलान और बागमती नदियां उफान पर

🌊 नेपाल में बारिश से बिहार में बढ़ा खतरा

नेपाल में पिछले पांच दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने अब बिहार में भी तबाही मचानी शुरू कर दी है। कोसी बराज के सभी 56 गेट खोल दिए जाने के बाद कोसी, कमला बलान और बागमती नदी उफान पर हैं।
इसका सीधा असर सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया और दरभंगा जैसे जिलों पर पड़ रहा है, जहां बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।

प्रशासन ने लोगों से निचले इलाकों को खाली करने और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है। लाखों की आबादी के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।


🚨 कोसी बराज के 56 गेट खोले गए

नेपाल की तरफ से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण कोसी बराज से बीते 24 घंटे में करीब साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है।

बाढ़ नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी ने बताया —

“कोसी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सभी 56 गेट खोलने के बावजूद पानी का दबाव कम नहीं हो रहा है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है।”


🌧️ मानसूनी बारिश और अधवारा समूह की धाराएं भी बनीं संकट

नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में मानसूनी बारिश जारी है। इसके साथ ही अधवारा समूह की छोटी-छोटी नदियां, जो मानसून में अक्सर उफन जाती हैं, अब तेज बहाव में हैं।
इन नदियों के उफान से उत्तर बिहार के कई जिलों में पानी भरने लगा है, जिससे सड़क संपर्क टूटने और जनजीवन ठप पड़ने की स्थिति बन गई है।


🏞️ क्यों कोसी नदी कहलाती है ‘बिहार की शोक’

कोसी नदी को ‘बिहार की शोक’ (Sorrow of Bihar) कहा जाता है। इसका कारण है कि यह नदी बार-बार अपना मार्ग बदलती रहती है और तटबंधों को तोड़ देती है
नेपाल से निकलने वाली यह नदी बिहार में प्रवेश करते ही अपने साथ विशाल मात्रा में गाद और पानी लाती है, जिससे हर साल भारी बाढ़ की स्थिति बनती है।

इसके अलावा, कमला बलान नदी मधुबनी, दरभंगा और सहरसा से होकर गुजरती है और बाढ़ का मुख्य कारण बनती है, जबकि बागमती नदी नेपाल की पहाड़ियों से निकलकर उत्तरी बिहार के कई जिलों में तबाही मचाती है।


🏚️ लाखों लोग प्रभावित, प्रशासन अलर्ट पर

सहरसा, सुपौल, मधेपुरा और खगड़िया जिले इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ग्रामीण इलाकों में घरों और खेतों में पानी भर गया है। कई स्थानों पर सड़कें और पुल डूब गए हैं, जिससे राहत कार्यों में भी दिक्कत हो रही है।

प्रशासन ने आपात स्थिति जैसी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जिलाधिकारी सहरसा ने कहा —

“लाउडस्पीकर से लगातार लोगों को सतर्क किया जा रहा है। जो लोग निचले इलाकों में रहते हैं, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।”


🚤 राहत और बचाव दल सक्रिय

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है।
कई जगहों पर नावों की मदद से लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार ने आवश्यक वस्तुएं, दवाइयां और खाने-पीने का सामान भेजने की व्यवस्था की है।


🇳🇵 नेपाल में तबाही, बिहार में असर

नेपाल में जारी भारी बारिश के कारण अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग लापता बताए जा रहे हैं।
वहीं, नेपाल की नदियों में आए उफान ने बिहार की सीमाओं में प्रवेश कर लिया है, जिससे राज्य में स्थिति और गंभीर होती जा रही है।


⚠️ प्रशासन की अपील — “सतर्क रहें, अफवाहों से बचें”

बिहार सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। बिजली, संचार और सड़क सेवाओं को दुरुस्त रखने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।


📜 निष्कर्ष

नेपाल में लगातार बारिश और कोसी बराज से छोड़े गए पानी ने बिहार के पांच जिलों को फिर से डूबने की कगार पर पहुंचा दिया है
कोसी, कमला बलान और बागमती जैसी नदियां एक बार फिर बिहार के लिए संकट बन गई हैं।
सरकार ने राहत कार्यों को तेज कर दिया है, लेकिन स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।

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