हरियाणा IPS वाई पूरन कुमार सुसाइड केस: जिन 13 अफसरों पर लगे आरोप, सुसाइड नोट में दर्ज हुआ सबका रोल

13 अफसरों पर लगे आरोप, सुसाइड नोट में दर्ज हुआ सबका रोल

हरियाणा के एडीजीपी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। उनके फाइनल सुसाइड नोट में जिन 13 वरिष्ठ IPS और IAS अधिकारियों के नाम दर्ज हैं, उन पर अब चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोप है कि इन अफसरों ने पूरन कुमार को लगातार जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और करियर में रुकावटें डालने जैसी साजिशों से तोड़ा।


फाइनल नोट में दर्ज सभी अफसरों के नाम और आरोप

सुसाइड नोट में दर्ज आरोपों के अनुसार, वाई. पूरन कुमार ने बताया कि उन्हें वर्षों तक प्रणालीगत अन्याय, अपमान और भेदभाव झेलना पड़ा। नीचे दी गई सूची में उन 13 अफसरों के नाम और भूमिका दर्ज हैं:

  1. शत्रुजीत कपूर (डीजीपी, हरियाणा) — आरोप है कि उन्होंने पूरन कुमार को सार्वजनिक रूप से बेइज्जत किया, वेतन एरियर रोकवाए और झूठी शिकायतें दर्ज कराईं।

  2. संजय कुमार (एडीजीपी, 1997 बैच) — कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से अपमान और झूठे आरोप लगाने का आरोप।

  3. पंकज नैन (आईजीपी, 2007 बैच) — मानसिक प्रताड़ना और APR रिपोर्ट खराब करने की साजिश का आरोप।

  4. कला रामचंद्रन (आईपीएस, 1994 बैच) — झूठी शिकायतों के जरिए परेशान करने का आरोप।

  5. संदीप खिरवार (आईपीएस, 1995 बैच) — गुरुग्राम से ट्रांसफर के बाद झूठे मामलों में फंसाने की साजिश का आरोप।

  6. सिबाश कविराज (आईपीएस, 1999 बैच) — गुरुग्राम में तैनाती के दौरान झूठी शिकायतों में शामिल होने का आरोप।

  7. मनोज यादव (पूर्व डीजीपी, 1998 बैच) — अंबाला में जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप।

  8. पी.के. अग्रवाल (पूर्व डीजीपी, 1988 बैच) — भेदभावपूर्ण रवैये और मानसिक उत्पीड़न में शामिल होने का आरोप।

  9. टी.वी.एस.एन. प्रसाद (आईएएस, 1988 बैच) — भेदभावपूर्ण और पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप।

  10. राजीव अरोड़ा (पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा) — पिता के अंतिम दर्शन की अनुमति न देने का आरोप, जिससे वाई. पूरन कुमार अपने पिता से आखिरी बार नहीं मिल पाए।

  11. अमिताभ ढिल्लों (एडीजीपी) — आरटीआई मांगने पर दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई और वेतन बचत को संदिग्ध बताने का आरोप।
    12-13. दो अन्य अधिकारियों के नाम भी पूरन कुमार के नोट में दर्ज बताए जा रहे हैं, जिनकी पुष्टि जांच में होनी बाकी है।


IAS पत्नी अमनीत पी. कुमार की शिकायत और चार प्रमुख मांगें

आईपीएस वाई. पूरन कुमार की पत्नी अमनीत पी. कुमार, जो खुद हरियाणा कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, ने पति की मौत के अगले दिन सेक्टर-11 थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि उनके पति को जातिगत और मानसिक रूप से लगातार प्रताड़ित किया गया।

अमनीत कुमार ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को भेजे पत्र में चार मुख्य मांगें रखीं:

  1. सुसाइड नोट में नामित सभी 13 अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

  2. आरोपियों को निलंबित और गिरफ्तार किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो।

  3. परिवार, खासकर दोनों बेटियों को स्थायी सुरक्षा कवर दिया जाए।

  4. परिवार की गरिमा और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

इन्हीं मांगों के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने देर रात प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


मौत से पहले लिखी वसीयत और आखिरी संदेश

घटना 7 अक्टूबर की दोपहर की बताई जा रही है। वाई. पूरन कुमार ने अपने सेक्टर-6 स्थित सरकारी आवास के बेसमेंट में सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मारी। उन्होंने 6 अक्टूबर को वसीयत तैयार की और अपनी सारी संपत्ति पत्नी अमनीत पी. कुमार के नाम कर दी। उसी दिन उन्होंने नौ पन्नों का सुसाइड नोट लिखा और ईमेल से पत्नी को भेजा।

विदेश दौरे पर जापान गईं अमनीत ने उन्हें 15 बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बेटी अमुल्या जब घर पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था — खिड़की तोड़ने पर देखा कि पूरन कुमार बेसमेंट में मृत पड़े थे।


हरियाणा प्रशासन में मचा हड़कंप

एफआईआर दर्ज होने के बाद हरियाणा पुलिस और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। अभी तक किसी नामजद अधिकारी की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कई अफसर कानूनी सलाह ले रहे हैं।
चंडीगढ़ पुलिस ने बताया कि जिनके नाम सुसाइड नोट में दर्ज हैं, उन्हें नोटिस भेजे जाएंगे और जांच सभी पहलुओं पर होगी।


एक ईमानदार अफसर की दर्दनाक दास्तान

वाई. पूरन कुमार को हरियाणा पुलिस के काबिल, ईमानदार और सख्त अफसरों में गिना जाता था। उन्होंने कई जिलों में सेवा दी और कभी समझौता नहीं किया। उनके सहयोगियों का कहना है — “वे न्यायप्रिय और निष्पक्ष अफसर थे, लेकिन प्रणालीगत भेदभाव ने उनकी आत्मा को तोड़ दिया।”

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