कर्नूल में दर्दनाक हादसा, पुलिस जांच में नया खुलासा
आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में शुक्रवार तड़के हुए भीषण बस हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही एक स्लीपर बस में आग लगने से 19 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। शुरुआत में माना जा रहा था कि आग बाइक के फ्यूल टैंक से लगी थी, लेकिन पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आग का असली कारण बस की दो 12 केवी बैटरियों का विस्फोट था।
कर्नूल रेंज के डीआईजी कोया प्रवीन ने बताया कि बस में आग दो अलग-अलग जगहों से फैली—पहली बाइक के टैंक फटने से और दूसरी बस की बैटरी टूलकिट के पास से। उन्होंने कहा, “जांच में पाया गया है कि बस की दो 12 केवी बैटरियां फटीं, जिससे आग तेजी से फैल गई और यात्रियों को निकलने का मौका नहीं मिला।”
ज्वलनशील सामग्री ने आग को और भड़काया
पुलिस ने बताया कि बस में कई ज्वलनशील सामग्री मौजूद थीं, जैसे मेटैलिक पेंट और अन्य औद्योगिक पदार्थ, जो आग को और भड़काने का कारण बने। हादसे के समय बस में कुल 44 यात्री सवार थे। कई यात्रियों ने किसी तरह खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन 19 लोग बस की लपटों में फंसकर जान गंवा बैठे।
कैसे हुआ हादसा: बाइक टकराने के बाद भड़की आग
यह दर्दनाक घटना शुक्रवार तड़के करीब 1:30 बजे कर्नूल जिले के चिन्ना टेकुरु गांव के पास हुई। हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही स्लीपर बस ने सड़क किनारे गिरी एक बाइक को कुचल दिया। बताया जा रहा है कि बाइक पहले से ही एक अन्य हादसे का शिकार थी और सड़क पर पड़ी थी। टक्कर के बाद बाइक बस के नीचे फंस गई और उसका फ्यूल टैंक फट गया।
फ्यूल टैंक के फटते ही आग की लपटें बस के नीचे तक पहुंचीं और वहां लगी 12 केवी बैटरियों ने धमाके के साथ विस्फोट किया। इसके बाद आग ने पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया।
ड्राइवर और सहायक चालक हिरासत में
पुलिस ने बस चालक मिरियाला लक्ष्मैय्या (42) और सहायक चालक शिवा नारायण को हिरासत में लिया है। प्राथमिक जांच में चालक लक्ष्मैय्या को तेज रफ्तार और लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना गया है। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125(ए) (मानव जीवन को खतरे में डालना) और धारा 106(1) (लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना) के तहत मामला दर्ज किया है।
बस से कूदकर बचा ड्राइवर, लेकिन यात्रियों को नहीं बचा सका
कर्नूल एसपी विक्रांत पाटिल ने बताया कि हादसे के दौरान बस चालक ने तुरंत गाड़ी से कूदकर अपनी जान बचाई। बाहर आने के बाद उसने सहायक चालक को जगाया और दोनों ने मिलकर यात्रियों को निकालने की कोशिश की। उन्होंने खिड़कियों के शीशे तोड़े, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस जलकर राख हो गई।
चालक हादसे के बाद कुछ समय के लिए मौके से फरार हो गया था, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
हादसे ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
यह हादसा न केवल मानव त्रासदी है, बल्कि बसों में सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल उठाता है। यात्रियों ने बताया कि बस में पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण नहीं थे और न ही आपातकालीन दरवाजे सही से काम कर रहे थे।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बस में लगी बैटरियों की स्थिति क्या थी और क्या उनमें कोई तकनीकी खराबी पहले से मौजूद थी। परिवहन विभाग को इस मामले में नोटिस भेजा गया है।
पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा
राज्य सरकार ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपने के निर्देश दिए हैं और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा नियम लागू करने की बात कही है।
निष्कर्ष: एक लापरवाही, 19 जिंदगियों की कीमत
कर्नूल बस हादसा इस बात की याद दिलाता है कि थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। बैटरी विस्फोट जैसी घटनाएं अब बसों में आग का नया कारण बनती जा रही हैं, जिन पर तत्काल नियंत्रण जरूरी है। पुलिस की जांच जारी है, लेकिन 19 परिवारों के लिए यह दर्दनाक हादसा हमेशा याद रहेगा।
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