दिल्ली में बिना बादल बरसी कृत्रिम बारिश: क्लाउड सीडिंग का दूसरा ट्रायल सफल, तीसरा आज होगा

दिल्ली में बिना बादल बरसी कृत्रिम बारिश

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण से राहत पाने के लिए वैज्ञानिकों और प्रशासन ने क्लाउड सीडिंग तकनीक का सहारा लिया है। बुधवार को इस तकनीक के तहत दूसरा सफल ट्रायल किया गया।
दिल्ली के कई इलाकों — खेकड़ा, बुराड़ी और मयूर विहार — में लगभग आधे घंटे तक कृत्रिम बारिश कराई गई। यह ट्रायल सेसना प्लेन के जरिए मेरठ से दिल्ली के बीच किया गया।


क्या है क्लाउड सीडिंग तकनीक?

क्लाउड सीडिंग एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें आसमान में मौजूद बादलों में रासायनिक कणों (फ्लेयर) का छिड़काव किया जाता है ताकि बादल घने होकर बारिश करें।
इस प्रक्रिया में सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड और पोटेशियम क्लोराइड जैसे पदार्थों का उपयोग होता है, जो जलवाष्प को संघनित कर कृत्रिम वर्षा उत्पन्न करते हैं।
दिल्ली में यह तकनीक इसलिए अपनाई गई है ताकि हवा में मौजूद प्रदूषक कण नीचे बैठ जाएं और लोगों को सांस लेने के लिए कुछ राहत मिल सके।


दूसरा ट्रायल रहा सफल

बीते दिन हुए दूसरे ट्रायल को सफल बताया गया है।
जानकारी के अनुसार, इस ट्रायल में 8 फ्लेयर का उपयोग किया गया और पूरा ऑपरेशन लगभग 30 मिनट तक चला।
ट्रायल के बाद कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी देखी गई। इससे यह साबित हुआ कि तकनीक के जरिए बिना घने बादलों के भी बारिश संभव है।


तीसरे ट्रायल की तैयारी पूरी

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (DSGMC) के सदस्य मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि

“क्लाउड सीडिंग का दूसरा ट्रायल पूरी तरह सफल रहा है और तीसरा ट्रायल आज ही किया जाएगा। आने वाले कुछ दिनों में ऐसे कई छोटे-छोटे ट्रायल किए जाएंगे ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके।”

उन्होंने बताया कि तीसरे ट्रायल में भी सेसना विमान का उपयोग होगा, और यह ट्रायल दिल्ली-एनसीआर के अन्य प्रदूषित इलाकों में किया जाएगा।


कब हो सकती है बारिश?

सिरसा के अनुसार, ट्रायल के बाद 15 मिनट से लेकर 4 घंटे के भीतर बारिश होने की संभावना रहती है।
इस तकनीक का असर मौसम की स्थिति और हवा की नमी पर निर्भर करता है।
मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि सफल क्लाउड सीडिंग से प्रदूषण का स्तर अस्थायी रूप से 20–25% तक घटाया जा सकता है।


प्रदूषण पर लगाम लगाने की कोशिश

दिल्ली में पिछले कई हफ्तों से एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
सांस की बीमारियों, आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायतें बढ़ रही हैं।
इसी को देखते हुए सरकार ने वैज्ञानिकों और मौसम विभाग की मदद से यह प्रयोग शुरू किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्लाउड सीडिंग जैसी तकनीकें तात्कालिक राहत तो दे सकती हैं, लेकिन यह प्रदूषण की स्थायी समस्या का समाधान नहीं हैं।


नागरिकों ने जताई राहत

कई इलाकों में हुई हल्की बारिश के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर क्लाउड सीडिंग की सराहना की।
लोगों ने कहा कि इससे हवा थोड़ी साफ महसूस हो रही है और प्रदूषण का असर कम हुआ है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इस तकनीक को वैज्ञानिक तरीके से नियमित रूप से लागू करना जरूरी है, ताकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन हो सके।


सरकार और IIT टीम की संयुक्त पहल

दिल्ली सरकार ने इस परियोजना को IIT कानपुर के वैज्ञानिकों के सहयोग से शुरू किया है।
इस टीम ने पहले भी महाराष्ट्र और गुजरात में क्लाउड सीडिंग के सफल प्रयोग किए हैं।
दिल्ली में यह प्रोजेक्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के साथ मिलकर चलाया जा रहा है।


आगे की योजना

प्रशासन की योजना है कि अगर यह तीसरा ट्रायल भी सफल रहता है, तो नवंबर के पहले हफ्ते में क्लाउड सीडिंग के कई बड़े ऑपरेशन किए जाएंगे।
इनका लक्ष्य पूरे एनसीआर क्षेत्र — गुरुग्राम, नोएडा, गाज़ियाबाद और फरीदाबाद — को कवर करना है।


निष्कर्ष:
दिल्ली में बिना बादल हुई बारिश यह दिखाती है कि तकनीक की मदद से पर्यावरणीय संकटों से निपटा जा सकता है।
हालांकि, प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण के लिए वाहनों, उद्योगों और निर्माण कार्यों से निकलने वाले धुएं पर भी सख्त कदम उठाना जरूरी है।

यह भी पढ़ें:  जयपुर में बड़ा हादसा: हाईटेंशन तारों से टकराई स्लीपर बस में लगी आग, दो की मौत, कई घायल

One thought on “दिल्ली में बिना बादल बरसी कृत्रिम बारिश: क्लाउड सीडिंग का दूसरा ट्रायल सफल, तीसरा आज होगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *