शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को नम आंखों से अंतिम विदाई; पुलिस महकमे में गम और गर्व का माहौल

सहकर्मी, अधिकारी और परिवार—सबकी आंखें नम थीं।

7 नक्सलियों का एनकाउंटर करने वाले जांबाज को बालाघाट में दी गई श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए मध्य प्रदेश पुलिस के हॉक फोर्स इंस्पेक्टर आशीष शर्मा का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके गृह जिले बालाघाट लाया गया। जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पुलिस लाइन में पहुंचा, पूरा परिसर गमगीन हो गया। सहकर्मी, अधिकारी और परिवार—सबकी आंखें नम थीं

SP के सीने से लिपटकर रो पड़े जवान, पुलिस महकमा भावुक

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला। हॉक फोर्स के जवान अपने शहीद साथी को अंतिम विदाई देते हुए बिलख पड़े। जवानों को इस तरह टूटता देख बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा भी खुद को रोक नहीं पाए और आंखें भर आईं। पुलिस महकमे में यह दृश्य साफ दिखाता है कि इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की बहादुरी और व्यक्तित्व को लेकर विभाग में कितना सम्मान था।

छोटा भाई तिरंगा देख टूट पड़ा

जब छोटे भाई अंकित शर्मा ने अपने बड़े भाई को तिरंगे में लिपटा देखा तो वह जमीन पर साष्टांग लेटकर फूट-फूटकर रोने लगा। परिवार के इस दर्दनाक पल ने वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं। माहौल में शोक और गर्व दोनों ही भाव दिख रहे थे—एक ओर परिवार का दर्द, दूसरी ओर एक जवान का अदम्य साहस।

कम उम्र में दो गैलेंट्री अवॉर्ड, हॉक फोर्स के ‘आइडल कमांडो’

सिर्फ 29 साल की उम्र में इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को दो बार वीरता पदक मिल चुके थे। हॉक फोर्स में उन्हें आइडियल कमांडो के रूप में जाना जाता था। प्रशिक्षुओं को उनके बहादुरी के किस्से प्रेरणा के तौर पर सुनाए जाते थे। उनके साहस और उत्कृष्ट कार्य के कारण उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बनाया गया था।

हॉक फोर्स की टीम के मुताबिक, आशीष शर्मा नक्सल विरोधी ऑपरेशन में हमेशा सबसे आगे रहते थे। जिस मुठभेड़ में उन्होंने वीरगति पाई, उसमें उन्होंने 7 नक्सलियों का एनकाउंटर किया था।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि, परिवार के लिए की बड़ी घोषणा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी बालाघाट पहुंचकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आशीष शर्मा का सर्वोच्च बलिदान नक्सल उन्मूलन के अभियान को और मजबूत करेगा।

सीएम ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि शहीद आशीष शर्मा ने नक्सलियों से लड़ते हुए अभूतपूर्व साहस दिखाया। वह पहले भी कर्तव्य के दौरान असाधारण बहादुरी के लिए दो बार वीरता पदक से सम्मानित हो चुके थे।

छोटे भाई को सरकारी नौकरी मिलेगी

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में घोषणा की कि राज्य सरकार शहीद के परिवार का पूरा ध्यान रखेगी। उन्होंने कहा:

  • परिवार को सम्मान निधि और सभी सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी

  • शहीद के छोटे भाई को सरकारी नौकरी दी जाएगी

  • सरकार इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ी है

गाडरवाड़ा का बेटा, पूरे प्रदेश का गौरव

शहीद आशीष शर्मा मूल रूप से नरसिंहपुर जिले की तहसील गाडरवाड़ा के रहने वाले थे। वह अपने पीछे माता-पिता और छोटे भाई को छोड़ गए हैं। उनके गांव और जिला नरसिंहपुर में भी शोक की लहर है। लोग उन्हें “साहसी बेटा” कहकर याद कर रहे हैं।

बहादुरी की मिसाल बन गए आशीष

अंतिम विदाई की तस्वीरों और दृश्यों ने पूरे प्रदेश को भावुक कर दिया। नक्सल विरोधी ऑपरेशन में अदम्य साहस दिखाने वाले आशीष शर्मा आज करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उनकी शहादत ने एक बार फिर दिखाया कि देश की सुरक्षा के लिए जवान किस हद तक जाना जानते हैं।

यह भी पढ़ें:  मेरठ में डॉक्टर की लापरवाही: बच्चे की आंख के पास लगी चोट पर लगा दी फेविक्विक, तीन घंटे बाद हटाकर लगाए गए टांके

One thought on “शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को नम आंखों से अंतिम विदाई; पुलिस महकमे में गम और गर्व का माहौल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *