यूपी के चर्चित कफ सिरप कांड में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। लखनऊ के आदर्श कारागार में तैनात सिपाही महेंद्र सिंह को डीजी जेल ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि वह इस बड़े रैकेट के तीन मुख्य आरोपियों—बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह, अमित सिंह टाटा और मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल—का करीबी था।
50 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन
कफ सिरप कांड की जांच कर रही यूपी एसटीएफ को एक अहम सुराग तब मिला जब जांच में पाया गया कि आरोपी आलोक सिंह के बैंक खातों से महेंद्र सिंह की पत्नी रीता सिंह के खाते में 50 लाख रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन हुआ है।
यह लेनदेन ऐसे समय हुआ जब कफ सिरप रैकेट से जुड़े कई वित्तीय नेटवर्क का खुलासा किया जा रहा था।
अफसरों का कहना है कि इन ट्रांजेक्शनों की टाइमलाइन और बैंकिंग पैटर्न शक को और मजबूत करते हैं। जल्द ही धन के स्रोत और उद्देश्य की गहन जांच की जाएगी।
9777 नंबर की एसयूवी भी जांच के घेरे में
जांच में यह भी सामने आया कि सिपाही महेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी के नाम पर एक महंगी SUV खरीदी, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर 9777 है। यह विशेष सीरीज वाला नंबर रैकेट से जुड़े अन्य लोगों द्वारा भी उपयोग किया जाता रहा है।
गाड़ी के रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों में स्थायी पता उन्नाव जेल और वर्तमान पता लखनऊ के सुल्तानपुर रोड स्थित एक कॉलोनी में दर्ज पाया गया है।
महेंद्र सिंह पहले उन्नाव कारागार में तैनात था, जहाँ से उसके कई संदिग्ध संपर्कों की शुरुआत बताई जा रही है।
सोशल मीडिया पर आरोपी के साथ तस्वीरें वायरल
महेंद्र सिंह की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं, जिनमें वह—
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अमित सिंह टाटा,
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आलोक सिंह,
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और इस रैकेट के मुख्य सरगना शुभम जायसवाल
के साथ नजर आ रहा है। एक तस्वीर में वह पूर्व सांसद धनंजय सिंह के साथ भी दिखाई देता है। इन तस्वीरों ने उसकी संलिप्तता पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला कैसे शुरू हुआ?
कफ सिरप कांड तब सामने आया जब एसटीएफ ने पाया कि लखनऊ, उन्नाव और आसपास के जिलों में बड़े पैमाने पर कोडीन-आधारित कफ सिरप की अवैध सप्लाई की जा रही थी। इसमें कई पुलिसकर्मी, कारोबारी और अपराधी शामिल पाए गए।
इस नेटवर्क से करोड़ों रुपये की अवैध कमाई होने की आशंका है।
डीजी जेल का एक्शन और आगे की कार्रवाई
डीजी जेल के आदेश पर:
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सिपाही महेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
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विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
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उसके बैंक ट्रांजेक्शन, संपत्ति और संदिग्ध संपर्कों की गहन जांच की जाएगी।
पुलिस अब आलोक और महेंद्र के बीच हुए पैसों के लेनदेन से पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष
कफ सिरप कांड में सिपाही महेंद्र सिंह का नाम सामने आना इस बात का संकेत है कि यह रैकेट बेहद गहराई तक फैला हुआ था।
50 लाख रुपये का लेनदेन, महंगी SUV और अपराधियों के साथ करीबी संपर्क इस मामले को और गंभीर बनाते हैं।
एसटीएफ और जेल विभाग की जांच आगे और कई बड़े खुलासों की ओर इशारा कर रही है।
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