भोपाल: मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। थैलेसीमिया से पीड़ित छह मासूम बच्चों के HIV पॉजिटिव पाए जाने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल सख्त कदम उठाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने छह सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सतना से शुरू हुआ मामला, अन्य जिलों तक आशंका
प्राप्त जानकारी के अनुसार, HIV संक्रमित पाए गए छह बच्चों में से चार मामले सतना जिले के एक सरकारी अस्पताल से जुड़े हैं। ये सभी बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं और उन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाया जाता था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि दूषित या ठीक से जांच न किए गए रक्त के कारण इन बच्चों में HIV संक्रमण हुआ।
इसके अलावा जबलपुर और अन्य जिलों से भी ऐसे संकेत मिले हैं, जिससे साफ है कि मामला केवल एक अस्पताल या जिले तक सीमित नहीं हो सकता।
सरकार ने बनाई 6 सदस्यीय जांच समिति
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त तरुण राठी ने इस पूरे मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति के गठन के आदेश जारी किए हैं। समिति को सात दिन में विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।
जांच समिति की अध्यक्षता रीवा संभाग के क्षेत्रीय निदेशक (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) डॉ. सत्य अवधिया करेंगे।
समिति में ये विशेषज्ञ शामिल
जांच को निष्पक्ष और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए समिति में कई वरिष्ठ विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
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रूबी खान (उपनिदेशक, राज्य रक्त संक्रमण परिषद)
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डॉ. रोमेश जैन (रक्त संक्रमण विशेषज्ञ, एम्स भोपाल)
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डॉ. सीमा नवेद (भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं शोध केंद्र)
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संजीव जादौन (वरिष्ठ औषधि निरीक्षक, FDA)
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प्रियंका चौबे (औषधि निरीक्षक, FDA)
इन विशेषज्ञों की मौजूदगी से यह स्पष्ट है कि सरकार रक्त बैंकों, अस्पतालों और दवा नियंत्रण से जुड़े हर पहलू की गहराई से जांच कराना चाहती है।
12 से 15 साल के बच्चे हुए संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, HIV संक्रमित पाए गए सभी बच्चे 12 से 15 वर्ष की आयु के हैं। यह तथ्य मामले को और भी संवेदनशील बनाता है। नियमित जांच के दौरान HIV संक्रमण की पुष्टि हुई।
एक मामले में यह भी सामने आया है कि बच्चे के माता-पिता में से एक भी HIV पॉजिटिव है, जिससे संक्रमण के स्रोत को लेकर जांच और जटिल हो गई है।
जनवरी से मई के बीच सामने आए मामले
सतना के कलेक्टर सतीश कुमार एस ने बताया कि HIV संक्रमण के ये मामले जनवरी से मई 2024 के बीच सामने आए। सभी बच्चों का इलाज फिलहाल जारी है और उन्हें जरूरी चिकित्सकीय सहायता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया मरीजों के लिए नियमित रक्त संक्रमण जीवन रक्षक होता है, लेकिन यदि प्रक्रिया में थोड़ी भी लापरवाही हो, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।
रक्त बैंकों और अस्पतालों पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी और निजी रक्त बैंकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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क्या रक्त की सही जांच हो रही थी?
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क्या दाताओं की स्क्रीनिंग में लापरवाही हुई?
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क्या तय मानकों का पालन किया गया?
इन सभी बिंदुओं की जांच अब समिति करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री का बयान
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को हर संभव इलाज और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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