इंदौर में पानी से जुड़ी त्रासदी, इतिहास ने दोहराया खुद को
देश के सबसे साफ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में एक बार फिर पानी ने मौत का रूप ले लिया है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले संक्रमण ने कई जिंदगियां छीन लीं और सैकड़ों लोगों को अस्पताल पहुंचा दिया। यह हादसा इसलिए भी ज्यादा डरावना है, क्योंकि इसने करीब 30 साल पुरानी उस भयावह घटना की यादें ताजा कर दीं, जब शहर के एक इलाके में लोग अनजाने में लाश से सड़ा पानी पीते रहे थे।
30 साल पहले: जब टंकी में मिला इंसानी कंकाल
तीन दशक पहले इंदौर के सुभाष चौक क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई थी, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया था। पश्चिम इंदौर के हजारों घरों में जिस पानी की सप्लाई हो रही थी, उसी टंकी की सफाई के दौरान एक इंसानी कंकाल बरामद हुआ था।
हफ्तों तक लोग उसी पानी का इस्तेमाल करते रहे, लेकिन सच्चाई तब सामने आई, जब हालात बेकाबू हो चुके थे। उस समय नगर निगम पर कांग्रेस का शासन था और मधुकर वर्मा महापौर थे। इस घटना का राजनीतिक असर भी गहरा पड़ा और सालों तक कांग्रेस इंदौर में सत्ता से दूर रही।
भागीरथपुरा में वर्तमान हालात बेहद गंभीर
आज वही डरावनी तस्वीर भागीरथपुरा में देखने को मिल रही है। सीवर मिला दूषित पानी पीने से डायरिया और संक्रमण तेजी से फैला है। प्रशासन द्वारा जारी आंकड़े हालात की गंभीरता बयान कर रहे हैं।
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अब तक 6 मौतों की आधिकारिक पुष्टि
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398 मरीज अस्पतालों में भर्ती
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256 मरीज इलाज के बाद डिस्चार्ज
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142 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती
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इनमें से 11 मरीज ICU में
9,000 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग ने भागीरथपुरा को ग्राउंड ज़ीरो घोषित करते हुए व्यापक जांच शुरू की है।
अधिकारियों के अनुसार:
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2,354 घरों के
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9,416 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई
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इस दौरान 20 नए मरीज सामने आए
इलाके में अब भी स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं।
केंद्र की टीम भी जांच में जुटी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स (NIRBI) की एक विशेषज्ञ टीम इंदौर पहुंच चुकी है।
यह टीम बीमारी के कारणों की जांच कर रही है और स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे
जहां प्रशासन ने अब तक 6 मौतों की पुष्टि की है, वहीं
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मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने मौतों की संख्या 10 बताई है
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स्थानीय लोगों का दावा है कि 6 महीने के बच्चे सहित 16 लोगों की जान जा चुकी है
इन विरोधाभासी आंकड़ों ने प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्कर्ष
भागीरथपुरा जल संकट ने यह साफ कर दिया है कि इंदौर जैसे आधुनिक शहर में भी बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही कितनी घातक हो सकती है।
30 साल पहले की त्रासदी से सबक न लेना आज फिर भारी पड़ गया है। अब जरूरत है कि सिर्फ जांच और आंकड़ों तक सीमित न रहकर, पेयजल व्यवस्था में स्थायी सुधार किए जाएं, ताकि भविष्य में कोई शहर फिर ऐसी कीमत न चुकाए।
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