कानपुर गैंगरेप केस: पीड़िता का बयान दर्ज न होने पर कोर्ट सख्त, पुलिस की लापरवाही उजागर

पीड़िता का बयान दर्ज न होने पर कोर्ट सख्त

उत्तर प्रदेश के कानपुर में नाबालिग किशोरी के साथ हुए कथित गैंगरेप मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। घटना के दो दिन बाद भी पीड़िता का बयान दर्ज न होने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की ढिलाई न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि पीड़िता के अधिकारों के साथ भी अन्याय है।


आरोपी यूट्यूबर जेल में, दारोगा फरार

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे यूट्यूबर शिवबरन यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। हालांकि, घटना में संलिप्त बताए जा रहे दारोगा अमित मौर्य अब भी फरार हैं। उनकी तलाश में पुलिस की कई टीमें कानपुर के अलावा प्रयागराज और वाराणसी में दबिश दे रही हैं।


मेडिकल रिपोर्ट के बाद बढ़ी धाराएं

पीड़िता की मेडिकल जांच में यौन शोषण के स्पष्ट संकेत मिले हैं। डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने केस में सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की धारा जोड़ दी है। फोरेंसिक जांच के लिए सैंपल भेजे गए हैं और पीड़िता की उम्र की आधिकारिक पुष्टि के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को पत्र लिखा गया है।


एफआईआर में भारी लापरवाही, थाना प्रभारी निलंबित

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सचेंडी थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी ने शुरुआती एफआईआर महज छह लाइनों में दर्ज की थी, जिसमें कई अहम तथ्य शामिल नहीं किए गए। इस गंभीर लापरवाही के चलते इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को निलंबित कर दिया गया है। अब पूरे मामले की जांच एडीसीपी कपिल देव सिंह को सौंपी गई है।


काली स्कॉर्पियो से अगवा करने का आरोप

पुलिस जांच के मुताबिक, सचेंडी क्षेत्र के एक गांव की 14 वर्षीय किशोरी को आरोपी यूट्यूबर काली स्कॉर्पियो में जबरन बैठाकर ले गया था। इसके बाद उसे झांसी रेलवे लाइन के पास ले जाकर दुष्कर्म किया गया। शुरू में मामला एक आरोपी तक सीमित था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर सामूहिक दुष्कर्म की आशंका सामने आई।


कोर्ट में बयान दर्ज न होने पर नाराजगी

गुरुवार को किशोरी अपने परिवार के साथ कोर्ट पहुंची थी, लेकिन जांच अधिकारी समय पर मौजूद नहीं रहे। करीब तीन घंटे इंतजार के बाद कोर्ट ने पाया कि नाबालिग पीड़िता के मामले में अब तक पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज नहीं किया गया है। इस पर अदालत ने कड़ी फटकार लगाई।


पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज करने के निर्देश

अदालत ने निर्देश दिए कि पहले पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाए, उसके बाद ही पीड़िता के बयान कराए जाएं। पुलिस की इस चूक के कारण उस दिन पीड़िता का बयान दर्ज नहीं हो सका, जिससे न्याय प्रक्रिया और अधिक प्रभावित हुई।


फरार दारोगा की तलाश तेज

पुलिस के अनुसार, फरार दारोगा अमित मौर्य की आखिरी लोकेशन प्रयागराज में ट्रेस की गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने करीब दो महीने पहले स्कॉर्पियो खरीदी थी और उसके संबंध पहले से ही अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों से बताए जा रहे हैं।


परिवार का आरोप: जान को खतरा

पीड़िता के भाई ने आरोप लगाया कि आरोपी पुलिस विभाग से जुड़ा होने के कारण केस को कमजोर करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं और उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। परिवार ने सुरक्षा की मांग की है।


निष्कर्ष:
कानपुर गैंगरेप मामला न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि यह पुलिस व्यवस्था में मौजूद खामियों को भी उजागर करता है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि फरार आरोपी कब पकड़ा जाएगा और क्या पीड़िता को समय पर न्याय मिल पाएगा।

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