नई दिल्ली: भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। आज़ादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) साउथ ब्लॉक से बाहर स्थानांतरित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मकर संक्रांति के अवसर पर अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ परिसर से कामकाज शुरू करेंगे। यह कदम केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का अहम हिस्सा है।
सेवा तीर्थ में होगा प्रधानमंत्री का नया कार्यालय
नई व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय अब ‘सेवा तीर्थ-1’ भवन में संचालित होगा। यह भवन कार्यपालिका परिसर-1 में स्थित है और वायु भवन के पास बनाया गया है। इसी परिसर में सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3 नामक अन्य दो भवन भी मौजूद हैं।
सरकारी जानकारी के अनुसार, सेवा तीर्थ-2 में पहले ही कैबिनेट सचिवालय को स्थानांतरित किया जा चुका है, जबकि सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) का कार्यालय स्थापित किया जाएगा।
साउथ ब्लॉक से विदाई, इतिहास में नया अध्याय
यह स्थानांतरण इसलिए भी खास है क्योंकि आज़ादी के बाद से अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में ही स्थित रहा है। अब साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को खाली कर इन्हें ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ में बदला जाएगा।
इस संग्रहालय के माध्यम से आम जनता भारत की प्रशासनिक यात्रा, लोकतांत्रिक विकास और ऐतिहासिक विरासत को करीब से देख और समझ सकेगी।
सेवा तीर्थ परिसर की खासियतें
करीब 1,189 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सेवा तीर्थ परिसर लगभग 2.26 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका निर्माण देश की प्रमुख निर्माण कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (L&T) द्वारा किया गया है।
इस परिसर का डिज़ाइन ‘सेवा’ की थीम पर आधारित है, जिसमें आधुनिक तकनीक से लैस कार्यस्थल, बैठक कक्ष, और प्रशासनिक सुविधाएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
कोलोनियल विरासत से आगे बढ़ने की कोशिश
सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल भवन का स्थानांतरण नहीं है, बल्कि यह कोलोनियल सोच से बाहर निकलकर भारतीय मूल्यों पर आधारित प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। कर्तव्य पथ जैसे नाम परिवर्तन और सेंट्रल विस्टा परियोजना इसी सोच को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री का नया आवास भी निर्माणाधीन
सेवा तीर्थ परिसर के पास ही प्रधानमंत्री के नए आधिकारिक आवास ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव पार्ट-2’ का निर्माण कार्य भी जारी है। इसे प्रशासनिक सुधारों और आधुनिक कार्यशैली का प्रतीक माना जा रहा है।
नई कार्यप्रणाली, नए भारत का संकेत
प्रधानमंत्री कार्यालय का सेवा तीर्थ में स्थानांतरण भारत की बदलती शासन व्यवस्था और आधुनिक प्रशासनिक सोच का संकेत है। इसे नए भारत की कार्यप्रणाली और भविष्य की शासन व्यवस्था की मजबूत नींव के रूप में देखा जा रहा है।
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