ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत का मामला
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की संदिग्ध मौत के मामले में शुक्रवार को अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने इस केस में दो आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी है। यह मामला लंबे समय से चर्चा में है और अब कोर्ट के इस फैसले ने नया मोड़ ला दिया है।
किसे मिली जमानत?
इस मामले में लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी से जुड़े दो कर्मचारियों —
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रवि बंसल
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सचिन करनवाल
को कोर्ट ने जमानत दी है। दोनों आरोपी पहले पुलिस हिरासत में थे और उनकी ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई थी।
क्या है पूरा मामला?
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद उनके पिता राज कुमार मेहता ने नॉलेज पार्क कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एमजेड विजटाउन और लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया।
जांच के दौरान पुलिस ने
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एमजेड बिल्डर कंपनी के निदेशक अभय कुमार,
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तथा एमजेड विजटाउन से जुड़े रवि बंसल और सचिन करनवाल
के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की थी।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी बोड़ाकी ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों ने कोई अपराध नहीं किया है और उन्हें झूठे तरीके से फंसाया गया है।
वहीं, अभियोजन अधिकारी ने अदालत को बताया कि यह मामला जमानतीय प्रकृति का है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया।
कोर्ट का फैसला और जमानत की शर्तें
मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने माना कि आरोपियों को जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को
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25-25 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र,
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और इतनी ही राशि के एक-एक जमानती
पर रिहा करने का आदेश दिया।
हालांकि, कोर्ट ने जमानत के साथ कुछ कड़ी शर्तें भी लगाई हैं।
जमानत की मुख्य शर्तें
कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों के अनुसार:
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आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
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कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।
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जांच के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
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यदि विदेश यात्रा करनी होगी, तो पहले अदालत से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल आरोपियों को राहत मिली है, लेकिन जांच अभी जारी है। पुलिस आगे की जांच के आधार पर अपनी रिपोर्ट दाखिल करेगी। युवराज मेहता की मौत को लेकर परिवार अब भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।
निष्कर्ष
युवराज मेहता डेथ केस में कोर्ट का यह फैसला अहम माना जा रहा है। जमानत मिलने के बावजूद आरोपियों पर कानूनी शिकंजा बना रहेगा और जांच के नतीजों पर ही आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी। यह मामला न सिर्फ ग्रेटर नोएडा बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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